- धर्मसभा में तपाचार्य प्रसन्नसागरजी महाराज ने कहा
औरंगाबाद (विश्व परिवार) मानव जीवन संघर्षों से भरा है इसलिए मनुष्य को सदैव पाप कर्मों से बचते हुए पुण्य कर्म करने चाहिए। मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। संसार में हर व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के बाद केवल उसके पुण्य कर्म ही साथ जाते हैं, बुरे कर्म नहीं। धर्म का संदेश किसी पर थोपने का विषय नहीं, बल्कि उसे समझने और अनुभव करने का विषय है। यह विचार तपाचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज ने व्यक्त किए।
दिगंबर जैन समाज नीमच के तत्वावधान में भारतमाता-फोरजीरो चौराह्य के पीछे स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को तपाचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में विभिन्न अनुष्ठानों के साथ धर्मसभा की गई। इसमें तपाचार्य ने कहा कि यदि पाप कर्मों से बचना है तो सुबह उठने के बाद एक घंटे तक और सोने से दो घंटे पहले मोबाइल का उपयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नींद देर से आती है लेकिन मृत्यु कभी भी आ सकती है, इसलिए जीवन को सार्थक बनाने के लिए अच्छे कार्यों की हृदय से अनुमोदना करनी चाहिए।
जीवन के प्रत्येक चरण को सार्थक बनाने का संदेश
उन्होंने जीवन के प्रत्येक चरण को सार्थक बनाने का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को अलग-अलग आयु में अलग लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। 10 वर्ष की आयु में मस्ती, 20 वर्ष में सीखने की जिज्ञासा, 30 वर्ष में विवेक, 40 वर्ष में संयम जैसे रात्रि भोजन का त्याग, 50 वर्ष में भोगों से दूरी, 60 वर्ष में व्यापार और सांसारिक जिम्मेदारियों से विरक्ति, 70 वर्ष में विश्राम, 80 वर्ष में सादगी, 90 वर्ष में जीवन के प्रति संतोष और 100 वर्ष की आयु में संसार से विरक्ति का भाव रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि कोई मुनि नहीं बन सकता तो भी मुनि बनने जैसी भावना और प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए। एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब मनुष्य उस मार्ग पर चलने योग्य बन जाए। मीडिया प्रभारी अमन विनायका ने बताया कि धर्मसभा में नागपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा सहित देशभर से समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष विजय विनायका सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। संचालन अजय कासलीवाल ने किया।





