बलौदा बाजार (विश्व परिवार)। रिसदा रोड पर आयोजित जैन समाज के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में आस्था, भक्ति और संस्कारों का अनूठा संगम देखने को मिला। नवनिर्मित भव्य जैन मंदिर के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में जन सैलाब उमड़ पड़ा है। जैन समाज के प्रचार प्रसार मंत्री अनीश जैन ने बताया कि कार्यक्रम के शुरुआती दिनों में गर्भ कल्याणक और जन्म कल्याणक के पश्चात अब तप कल्याणक पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
तप और केवल ज्ञान का जीवंत चित्रण
महोत्सव के दौरान आदिनाथ भगवान की कठिन तपस्या और उसके पश्चात केवल ज्ञान प्राप्ति के दिव्य दृश्यों का मंचन किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। भक्ति की इस धारा में संयम काल की महा आरती का सौभाग्य स्व. श्री नेमीचंद जी छाबड़ा के परिवार (श्री दिनेश जैन) को प्राप्त हुआ। वहीं, शांति धारा की बोली का सौभाग्य श्री तुषार पाटनी एवं श्री कन्हैयालाल सेठी को प्राप्त हुआ। भगवान के बाल सखाओं के मनमोहक दृश्यों (बाल सभा) की बोली का सौभाग्य श्री नरेंद्र शोभा जैन को और पद प्रक्षालन का पुण्य लाभ श्री अखिलेश-मधु पाटनी परिवार को मिला।
आचार्य श्री का मानवतावादी संदेश
पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचन में मानवता का सूत्र देते हुए कहा:
”हमें धर्म, जाति, संप्रदाय और अमीर-गरीब की संकीर्णता से ऊपर उठना चाहिए। सदैव यह याद रखें कि हम सबसे पहले एक जीव हैं। जीव मात्र के प्रति दया और करुणा ही धर्म का वास्तविक आधार है।”
दिग्गजों ने टेका मत्था
इस आध्यात्मिक उत्सव में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, संगठन महामंत्री अजय जामवाल, उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा और जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आकांक्षा जायसवाल सहित कई पद अधिकारी ने शिरकत की। नगरपालिका अध्यक्ष श्री अशोक जैन ने सामाजिक सेवा की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और संस्कारों के संवाहक होते हैं।
सुचारू प्रबंधन और गरिमामयी उपस्थिति
पंडित धर्मचंद जी शास्त्री के कुशल विधि-विधान से पूरा कार्यक्रम संपन्न हो रहा है। जैन समाज अध्यक्ष संजय जैन एवं सचिव अमित जैन ने अतिथियों का सम्मान किया। इस दौरान महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती सुमन सुधीर छाबड़ा की सक्रियता और संरक्षकों—श्री इंद्र कुमार जैन, श्री महावीर प्रसाद जैन, पंडित धन प्रसाद जैन, श्री पदम चंद जैन, श्री प्रकाश चंद जैन, श्री रमेश जैन एवं श्री अशोक जैन के मार्गदर्शन में पूरा परिसर जन-समुद्र जैसा प्रतीत हो रहा था।





