- केटीएस तुलसी और फूलोदेवी नेताम का कार्यकाल समाप्त होगा, कांग्रेस भाजपा को मिलेंगी एक-एक सीटें
- कांग्रेस में बाहरी बनाम स्थानीय चेहरे को लेकर बहस
रायपुर (विश्व परिवार)। राज्य में अप्रैल में होने वाले राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। केटीएस तुलसी और फूलोदेवी नेताम का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस के हिस्से में एक-एक सीट जाना तय माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में खाली हो रही दो सीटों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
कांग्रेस में सिंघवी के नाम की चर्चा
कांग्रेस खेमे में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के नाम की चर्चा से प्रदेश इकाई में गुटबाजी देखी जा रही है। चर्चा है कि तेलंगाना में बाहरी उम्मीदवार के रूप में विरोध झेल रहे सिंघवी के लिए छत्तीसगढ़ को विकल्प बनाया जा सकता है। सिंघवी के पक्ष में केंद्रीय नेतृत्व की पैरवी और प्रदेश के शीर्ष नेताओं के कानूनी मामलों में उनकी भूमिका को अहम माना जा रहा है। हालांकि स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा पार्टी के भीतर मतभेद पैदा कर रहा है। एक धड़ा फिर किसी बाहरी को मौका देने के विरोध में है। बताया जा रहा है कि स्थानीय नेता अपनी बात रखने के लिए दिल्ली में हाईकमान से मुलाकात कर सकते हैं।
भाजपा में वापसी की कोशिश
सत्ताधारी भाजपा में विधानसभा चुनाव हार चुके कई नेता राज्यसभा के जरिए सक्रिय राजनीति में लौटने की कोशिश में हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार संगठन से जुड़े किसी स्थानीय चेहरे को मौका दिया जा सकता है।
राज्यसभा में कांग्रेस का दबदबा
राज्य की पांच राज्यसभा सीटों में फिलहाल चार कांग्रेस और एक भाजपा के पास है। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 68 सीटें मिलने के बाद समीकरण बदले थे। 2018 से 2023 के बीच रिक्त हुई चारों सीटें कांग्रेस को मिलीं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के 54, कांग्रेस के 35 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का एक विधायक है। वर्तमान संख्या बल के आधार पर भाजपा के हिस्से में तीन और कांग्रेस के खाते में दो सीटें आने की संभावना जताई जा रही है।





