नई दिल्ली (विश्व परिवार)। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, गैस और ईंधन की उपलब्धता, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर पूरी तरह सतर्क है और हर जरूरी कदम उठा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में बताया कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा है। अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीयों को संघर्ष वाले क्षेत्रों से सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, जिनमें ईरान से 700 से अधिक मेडिकल छात्र भी शामिल हैं। प्रभावित परिवारों को हर जरूरी मदद और इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से दो बार बातचीत की है। भारत लगातार खाड़ी देशों, ईरान, इजरायल और अमेरिका के संपर्क में है ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोला जा सके।
भारत ने साफ तौर पर नागरिकों, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा/परिवहन सिस्टम पर हमलों का विरोध किया है और सभी पक्षों से शांतिपूर्ण समाधान की अपील की है। सरकार ने बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। घरेलू एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। कुछ जगहों पर अफवाहों के कारण घबराहट में खरीदारी हुई, लेकिन सरकार ने इन अफवाहों को गलत बताया है।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कच्चा तेल और एलपीजी लेकर आने वाले जहाज लगातार भारत पहुंच रहे हैं और सप्लाई बनाए रखने के लिए बैकअप प्लान भी तैयार किए गए हैं। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने अपने तेल और गैस आयात के स्रोत 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिए हैं। इसके अलावा, 53 लाख टन से ज्यादा का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाया गया है, जिसे 65 लाख टन तक बढ़ाने की योजना है। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और घरेलू एलपीजी उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने 70,000 करोड़ रुपए का ‘मेड इन इंडिया’ शिपबिल्डिंग मिशन शुरू किया है। इसके तहत जहाज निर्माण, मरम्मत और रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाई जा रही है। रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि उर्वरकों (खाद) की पर्याप्त उपलब्धता है और किसानों पर इस संकट का बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा। राज्यों से कहा गया है कि गरीबों और मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ लगातार मिलता रहे और जमाखोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
सरकार ने रेस्तरां, ढाबों, कैंटीन और प्रवासी मजदूरों के लिए गैस सप्लाई को प्राथमिकता दी है। पहले 20 प्रतिशत कमर्शियल एलपीजी सप्लाई बहाल की गई और अब इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया है। घरेलू पीएनजी और सीएनजी सप्लाई 100 प्रतिशत जारी है, जबकि औद्योगिक और कमर्शियल सेक्टर को लगभग 80 प्रतिशत गैस दी जा रही है। एक ही दिन में 7,500 से ज्यादा पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं।
इसके साथ ही सरकार ने कहा है कि जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक करीब 3,400 छापे मारे गए, 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए, 642 एफआईआर दर्ज हुईं और 155 लोगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही, ऑयल कंपनियों ने 1,500 से ज्यादा औचक निरीक्षण किए हैं।
वहीं, समुद्री सुरक्षा की बात करें तो पर्शियन गल्फ में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। कोई भी भारतीय जहाज प्रभावित नहीं हुआ है। ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ नाम के दो एलपीजी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार करके भारत की ओर आ रहे हैं। नौवहन महानिदेशालय 20 भारतीय जहाजों और करीब 540 नाविकों की निगरानी कर रहा है। चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम काम कर रहा है, और अब तक 585 से ज्यादा नाविकों को वापस लाया जा चुका है।
विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास भी 24 घंटे हेल्पलाइन चला रहे हैं और लोगों की मदद कर रहे हैं। 28 फरवरी से अब तक करीब 4.02 लाख लोग भारत लौट चुके हैं। यूएई, सऊदी अरब, ओमान और कतर से फ्लाइट्स जारी हैं, जबकि कुवैत, बहरीन, ईरान और इजरायल में फंसे भारतीयों को सऊदी अरब, आर्मेनिया, अजरबैजान और जॉर्डन के रास्ते वापस लाया जा रहा है।





