रायपुर (विश्व परिवार)। AIIMS रायपुर ने 17 से 21 मार्च 2025 तक ऋषिकेश में एक अंतर्राष्ट्रीय योग शरीर रचना प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया, जिसका उद्देश्य योगिक प्रथाओं के वैज्ञानिक समझ के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना था। इस कार्यक्रम में रूस, यूरोप, दक्षिण अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अन्य देशों से 50 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैश्विक ज्ञान का सेतु स्थापित करना था, जिसमें आसनों और प्राणायाम की बायोमैकेनिक्स पर गहरी जानकारी प्रदान की गई, और मानव कंकाल मॉडल का उपयोग कर योग आसनों की सटीक बायोमैकेनिक्स को प्रदर्शित किया गया। कार्यशाला ने यह भी अन्वेषण किया कि कैसे योग, अपनी गहरी प्राचीन विद्या के साथ, शारीरिक, मानसिक और आत्मिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए लागू किया जा सकता है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को योग के शारीरिक सिद्धांतों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की, जिससे उन्हें इसके लाभों को और गहराई से समझने में मदद मिली। यह कार्यशाला AIIMS रायपुर के शरीर रचना विभाग के प्रोफेसर (डॉ.) मृंतुंजय राठौर द्वारा संचालित की गई, जिसे प्रतिनिधियों से उत्कृष्ट प्रतिक्रिया प्राप्त हुई, जिन्होंने कार्यक्रम की सामग्री की गहराई और स्पष्टता की सराहना की। प्रोफेसर राठौर की योग शरीर रचना में गहरी विशेषज्ञता ने सीखने के अनुभव को अत्यधिक प्रभावशाली और आकर्षक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
AIIMS रायपुर के निदेशक और CEO, लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने इस प्रकार की पहलों के महत्व पर जोर दिया और बताया कि ये न केवल वैश्विक स्वास्थ्य जागरूकता में योगदान करती हैं, बल्कि पारंपरिक प्रथाओं को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के साथ जोड़ने में भी मदद करती हैं, जिससे समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए योग के बेहतर समझ और आवेदन का सेतु बनता है।
AIIMS रायपुर की यह पहल योग के वैश्विक समझ को और मजबूत करती है और आधुनिक स्वास्थ्य प्रथाओं में इसके महत्व को उजागर करती है, जिससे दुनियाभर के व्यक्तियों और समुदायों को लाभ होता है।