गरियाबंदछत्तीसगढ़

उदंती-सीतानदी अभयारण्य में अतिक्रमण पर घमासान: 510 करोड़ की जमीन मामले में 166 आरोपी बोले— “हम प्रकृति प्रेमी”

गरियाबंद (विश्व परिवार)। जिस डिजिटल साक्ष्य के सहारे उदंती सीतानदी अभयारण्य प्रशासन 510 करोड़ की 850 हेक्टेयर भूमि से अवैध कब्जा हटाने में सफल हुआ था, अब उसे अतिक्रमणकारी चुनौती दे रहे हैं. 265 एकड़ में फैले हजारों पेड़ों की अवैध कटाई के बाद अतिक्रमण करने वाले 166 आरोपियों ने लिखित जवाब में कहा हम प्रकृति प्रेमी, पुरखों के द्वारा काबिज जमीन पर काश्तकारी करते आ रहे हैं. हमने अभयारण्य क्षेत्र में कोई नियम नहीं तोड़ा ।
उदंती सीतानदी अभयारण्य के सीतानदी रेंज में जैतपुरी से लगे इलाके में विगत 15 वर्षों में हजारों पेड़ों की कटाई कर 265 एकड़ वन भूमि पर काबिज आरोपी आज एकसाथ उदंती सीतानदी अभयारण्य के गरियाबंद स्थित दफ्तर पहुंचे. आरोपियों ने अपने लिखित जवाब में अवैध कब्जा के आरोप को खारिज कर डिजिटल साक्ष्य को नकारने की कोशिश की।
अतिक्रमणकारियों की दलील है कि गृह ग्राम जैतपुरी से लगे कक्ष क्रमांक 324 उनके निजी भूमि क्षेत्र के सीमा में आता है. अपने आप को प्रकृति प्रेमी बताते हुए कहा कि काबिज उनके पूर्वजों ने किया, उनके द्वारा दी गई काबिज भूमि पर ही वे काश्तकारी कर रहे हैं. आगे लिखा है कि कक्ष क्रमांक में हमेशा सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, ऐसे में उनके द्वारा कोई कटाई-सफाई नहीं किया गया है. वहीं उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि जो सेटेलाइट इमेज हमारे पास मौजूद है. उसके हिसाब से सारे पेड़ 2008 के बाद काटे गए और अतिक्रमण किया गया. अब कार्रवाई से बचने के लिए पुरखौती जमीन होने की दलील दे रहे हैं. खुद को प्रकृति प्रेमी बता रहे हैं जो मनगढ़ंत है।
अब कोर्ट में होगी सुनवाई
मामले में उपनिदेशक वरुण जैन ने कहा कि पर्याप्त डिजिटल साक्ष्य के आधार पर कार्यवाही की गई है. 2005 के बाद 2010 से 2022 के बीच सारे कटाई हुई है,सेटलाइट से जारी इमेजरी में इसका खुलासा हुआ है. 2011 तक 45 हेक्टेयर में कटाई हुई थी वही 10 साल बाद बढ़ कर 106 हेक्टेयर हो गया. पेड़ों के ठूठ और जलाए गए अवशेष का पंचनामा कर साक्ष्य जुटाए गए हैं. सभी 166 आरोपियों के विरुद्ध पीओआर क्रमांक 15/10,15/11,15/12 एवं 15/13 दर्ज कर वाइल्डलाइफ एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है. सारे सबूतों को न्यालय में प्रस्तुत किया जायेगा. जहां सच और झूठ का फैसला हो जाएगा।
510 करोड़ की भूमि हुई मुक्त
2008 के बाद काबिज लोगों का खुलासा 2022 से होना शुरू हुआ, जब उदंती सीतानदी अभयारण्य में उपनिदेशक बन कर वरुण जैन आए. आईटी एक्सपर्ट जैन उन्होंने ने 2023 में गूगल अर्थ की मदद से अभ्यारण का रिमोट सेंसिंग पोर्टल तैयार किया. इस पोर्टल में 20 साल से भी ज्यादा पुराना सैटेलाइट इमेजेस मौजूद है. 2006,2008,2010 में ली गई तस्वीरों के अध्ययन से अवैध कटाई और कब्जो का खुलासा होते गए।
बेदखली के बाद हरियाली बहाल
हालिया, कार्रवाई से पहले वरुण जैन ने घोरागांव, सोरमाल, बुढ़गेलटप्पा, बनवापारा, गरीबा, कोकड़ी, गोना, कांडसर, फरसरा, पीपलखुटा, कारिपानी, करलाझर नागेश इलाके से कुल 850 हेक्टेयर भूमि पर बेदखली की कार्रवाई किया. सभी में डिजिटल साक्ष्य की दलील मजबूती से कार्रवाई का ढाल बना रहा. मुक्त कराए गए जमीन की लागत 510 करोड़ आंकी गई. सभी में योजनाबद्ध तरीके से पौधरोपण और जलसंरक्षण के लिए कंटूर ट्रेंच जैसे स्ट्रक्चर का निर्माण कराया गया. अतिक्रमण से मुक्त हुई जमीन पर हरियाली बहाल हुई है।

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