छत्तीसगढ़रायपुर

हॉट-लाइन तकनीक से चालू रेलवे ट्रैक के ऊपर खींची गई 220 केवी लाइन

  • राजधानी की बिजली व्यवस्था होगी और मजबूत

रायपुर (विश्व परिवार)। राजधानी रायपुर की बिजली व्यवस्था को फुलप्रूफ बनाने के लिए दलदल सिवनी से रायता तक 220 केवी मल्टी सर्किट लाइन का कार्य हॉट-लाइन तकनीक से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। यह कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण था क्योंकि लगभग 60 मीटर ऊंचे दो टावरों के बीच मुंबई-हावड़ा का अत्यंत व्यस्त रेलवे ट्रैक है, जहां औसतन हर 10 मिनट में एक ट्रेन गुजरती है। वहीं टावर के पास लगभग 12 फीट गहरा नाला भी है। ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं ने हॉट-लाइन तकनीक का उपयोग करते हुए रेलवे ट्रैफिक को बिना बाधित किए इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह ने इस महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि पर ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं एवं पूरी टीम को बधाई दी।

ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि दलदल सिवनी से रायता तक 220 केवी मल्टी सर्किट लाइन का कार्य तकनीकी दृष्टि से अत्यंत जटिल था। रेलवे ट्रैक को बिना बाधित किए तथा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हॉट-लाइन तकनीक से इस कार्य को पूरा करना ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं की तकनीकी दक्षता और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दलदल सिवनी में निर्माणाधीन 220/132 केवी सब स्टेशन एवं इस लाइन सहित दोनों कार्यों पर लगभग 89 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। इसके पूर्ण होने पर रायता स्थित 400 केवी सब स्टेशन से दलदल सिवनी 220/132 केवी सब स्टेशन तक सीधे बिजली पहुंच सकेगी तथा रायपुर में बिजली आपूर्ति के लिए पहले उपलब्ध 220 केवी की चार सर्किट लाइनें बढ़कर छह सर्किट लाइनें हो जाएंगी।

लगभग 200 मीटर लंबे, मोटे एवं वजनी कंडक्टर को दूसरी ओर पहुंचाने के लिए पहले पायलट रोप तैयार किया गया। दोनों ओर पांच-पांच टन क्षमता की विंचिंग मशीनों का उपयोग किया गया। लगभग 90 डिग्री के कोण पर छह कंडक्टर (तार) खींचने में तीन दिन का समय लगा। 200 मीटर लंबे हिस्से को धीरे-धीरे खींचकर सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।

इस प्रकार रेलवे ट्रैफिक को बाधित किए बिना 220 केवी मल्टी सर्किट लाइन का कार्य पूर्ण किया गया। इस कार्य में डीआरएम कार्यालय के अधिकारी भी समन्वय बनाये रहे एवं ट्रैक पर सुरक्षा के इंतजाम के साथ निगरानी के लिये कर्मचारी तैनात किये गए थे। इस कार्य में कार्यपालक निदेशक संजय पटेल, मुख्य अभियंता (परियोजना) प्रसन्ना गोसावी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता ईश्वर कंवर, अधीक्षण अभियंता वीए देशमुख, कार्यपालन अभियंता यूके यादव, सहायक अभियंता सुरेश वर्मा, पीके तिवारी, प्रबोल मिश्रा, राम ठाकुर, प्रतीक मित्रा तथा एजेंसी लक्ष्मी सिद्धार्थ ट्रांसमिशन के वेणुगोपाल रेड्डी का विशेष योगदान रहा।

 

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