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लक्ष्मी-नारायण और कृष्णमूर्ति पैनल में शामिल; लक्ष्मी वर्मा का नाम सबसे आगे

  • छत्तीसगढ़ बीजेपी मातृशक्ति को भेज सकती है राज्यसभा..घोषणा आज

रायपुर (विश्व परिवार)। राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी में मंथन लगभग पूरा हो चुका है। बताया जा रहा है बीजेपी ने छत्तीसगढ़ की राज्यसभा सीट के लिए 7 नामों के पैनल में से 3 नामों को अंतिम रूप दे दिया है। इनमें लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी का नाम शामिल हैं। कहा ये भी जा रहा है कि पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा के नाम पर सहमति बना ली है। औपचारिक घोषणा आज की जा सकती है। पार्टी के अदंर लंबे समय से इस बात की चर्चा चल रही थी कि, इस बार राज्यसभा के लिए संगठन और सामाजिक समीकरण के साथ ही मातृशक्ति को मौका दिया जाए। इससे पहले शुरुआती पैनल में लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल, सरोज पांडेय, भूपेंद्र सवन्नी, किरण बघेल, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी और निर्मल का नाम शामिल था। विचार-विमर्श के बाद तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए गए है।
अभी ये हैं राज्यसभा सांसद
छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए वर्तमान में 5 सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें 2 सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जबकि 2 सदस्यों का कार्यकाल 2028 और 2030 तक जारी रहेगा। 9 अप्रैल 2026 तक कार्यकाल वाले सांसदों में फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी शामिल हैं। यह दोनों कांग्रेस पार्टी से हैं। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का कार्यकाल 29 जून 2028 तक है। वहीं भाजपा से देवेन्द्र प्रताप सिंह का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित है।
ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव
राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं। राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है।
‘मातृशक्ति’ को प्राथमिकता दे सकती है पार्टी
राजनीतिज्ञ जानकारों का कहना है कि, पार्टी इस बार ‘मातृशक्ति’ को प्राथमिकता देने के मूड में है। ऐसे में लक्ष्मी वर्मा का नाम सबसे आगे चल रहा है। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और महिला वर्ग में पकड़ को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि प्रेस कॉन्फ्रेंस या अधिकृत बयान के जरिए की जाएगी।
चंदेल-बांधी भी मजबूत दावेदार
नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी भी मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। दोनों का संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक पृष्ठभूमि मजबूत है, लेकिन महिला प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देने की रणनीति ने समीकरण बदल दिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, इस फैसले से पार्टी सामाजिक संतुलन और महिला सशक्तिकरण का संदेश देना चाहती है। अब सबकी नजरें आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो आज किसी भी समय हो सकती है।

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