जगदलपुर (विश्व परिवार)। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के आह्वान पर देशभर में चल रहे “गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध” के समर्थन में नगर के विख्यात समाजसेवी डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने घोषणा की है कि 11 मार्च 2026 को प्रातः 11 बजे जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा जाएगा।
डॉ. पांडेय ने बताया कि यह कार्यक्रम पूर्णतः शांतिपूर्ण और आस्था आधारित होगा। औपचारिक रूप से केवल दो व्यक्ति – डॉ. अरुण कुमार पांडेय एवं वयोवृद्ध नागरिक श्री चंचलमल जैन – कलेक्टर कार्यालय जाकर ज्ञापन सौंपेंगे।
उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की भीड़, नारेबाजी या प्रदर्शन नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह विषय राजनीति नहीं बल्कि सनातन आस्था और धर्मसम्मान से जुड़ा हुआ है। फिर भी जो भी श्रद्धालु गौ माता को अपनी माता मानते हैं और इस पुण्य कार्य में सहभागी बनना चाहते हैं, उनका स्वागत है।
डॉ. पांडेय ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज के समय में हिंदुत्व के नाम पर बहुत लोग केवल राजनीति चमकाने का काम कर रहे हैं, लेकिन न तो उन्हें पुराणों का ज्ञान है, न वैदिक परंपराओं का सम्मान। ऐसे लोग अवसर के अनुसार कभी हिंदू बनते हैं, कभी अन्य पर्व-त्योहारों में अपनी उपस्थिति दिखाकर केवल राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान शंकराचार्य जी द्वारा प्रारंभ किए गए इस पवित्र अभियान में सहभागी बनने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। जो लोग अपने जीवन और परलोक को सुधारने के लिए जगत माता कामधेनु का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है।
डॉ. पांडेय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गौ माता के संरक्षण जैसे पवित्र विषय पर भी दलगत राजनीति के कारण अपनी श्रद्धा से समझौता करता है, तो ऐसे लोग वही हैं जिन्हें हमारे ग्रंथों में कालनेमी कहा गया है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे भगवान बजरंगबली जी का मार्ग रोकने के लिए रामायण में कालनेमी राक्षस साधु का वेश धारण कर आया था, ठीक उसी प्रकार आज भी कुछ लोग सनातन का आवरण ओढ़कर भीतर से अलग मानसिकता रखते हैं।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं —
गौ माता को राष्ट्रमाता का संवैधानिक दर्जा दिया जाए।
पूरे देश में गौमांस के व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
गौ हत्या करने वालों के लिए अत्यंत कठोर दंड का प्रावधान किया जाए।
गौ माता को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी कार्य पर कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए।
प्रत्येक नगर में गौ माता के लिए स्वतंत्र विचरण की व्यवस्था की जाए।
जगह-जगह पानी, चारा, विश्राम और उपचार की व्यवस्था की जाए।
गौ माता को कैद कर रखने की प्रथा समाप्त कर सम्मानपूर्वक संरक्षण दिया जाए।
डॉ. पांडेय ने कहा कि करोड़ों सनातनी गौ माता को अपनी माता मानते हैं और यह सनातन सत्य है। यदि शासन व्यवस्था किसी जीव की सुरक्षा, भोजन, उपचार और संरक्षण के लिए संवैधानिक दर्जे की अपेक्षा करती है, तो गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देकर यह दायित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि जो लोग गौ माता के सम्मान में आगे आएंगे वही सच्चे हिंदू और सनातनी हैं, जबकि जो लोग इस पवित्र विषय पर भी मौन रहेंगे, इतिहास उन्हें स्वयं पहचान लेगा।





