- एलुमिनाई मीट में कैंटीन वाले सोनी चाचा भी पहुंचे
रायपुर (विश्व परिवार)। नेहरू मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम की पहली सीट पर लगभग 80 साल के बुजुर्ग बैठे थे। वे एलुमिनाई या रायपुर प्रोफेसर नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज के कैंटीन वाले सोनी चाचा थे। एलुमिनाई में कैंटीन वाले सोनी चाचा (मंसाराम सोनी) भी शामिल किए गए।
सोनी चाचा ने बताया कि 1992 से 2007 तक कैंपस में उनकी होटल थी। चाय और समोसा बच्चों को बहुत पसंद आता था। क्लास से पहले बच्चों की दिन की शुरुआत समोसे और चाय से होती थी।
नेहरू मेडिकल कॉलेज के 2000 बैच का रीयूनियन कैंपस के ऑडिटोरियम में हुआ। इस दौरान 25 साल बाद मिले पुराने दोस्तों के साथ बैच के प्रोफेसर ने भी यादें ताजा कीं।
“मैं जहां भी रहूं, मुझे कार्ड जरूर भेजिएगा”
मंच पर डॉ. सतीश शुक्ला ने कहा कि मेरी आंखों के सामने कैंपस को एम्स में बदलते देखा है। आप लोग की पढ़ाई के साथ दोस्ती जुड़ी। एलुमिनाई की पहल में मैं एक नई दिशा विकसित की—उन्नति एक्सटेंशन। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूं कि हम लोग फिर मिलें। आज से 25 साल बाद एलुमिनाई मीट होगी, कुछ लोग ऊपर होंगे। मैं जहां भी रहूं, मुझे कार्ड जरूर भेजिएगा।
गांधी झोला लेकर आते थे
डॉ. नाजिया कादरी ने बताया कि फर्स्ट ईयर में वे चोटी बनाकर कॉलेज आती थीं। कॉलेज आने के लिए गांधी झोला रखती थीं और क्लास में सभी ब्लैकबोर्ड वाली गांधी झोला लेकर आते थे। हॉस्टल में रहने के लिए सुबह लाइन लगानी होती थी।





