रायपुर (विश्व परिवार)। नवा रायपुर स्थित तूता घटनास्थल में डीएड अभ्यर्थियों का अपनी वैध नियुक्ति की मांग को लेकर जारी आमरण अनशन मंगलवार को 133वें दिन में प्रवेश कर गया। भीषण गर्मी, लू और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर परिस्थितियों के बावजूद अभ्यर्थी अपने संवैधानिक अधिकार की मांग को लेकर धरना स्थल पर डटे हुए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक शेष पदों पर नियुक्ति नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
स्वास्थ्य स्थिति
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के अनुसार, अब तक 300 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल रेफर किया जा चुका है। प्रतिदिन 2 से 3 अभ्यर्थी लू और डिहाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं। कई अभ्यर्थी बेहोशी, कमजोरी एवं गंभीर शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। मानसिक और भावनात्मक दबाव इतना अधिक है कि कुछ अभ्यर्थियों ने आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास भी किया।
विशेष स्थिति
शैलेन्द्र साहू पिछले 17 दिनों से बालाजी हॉस्पिटल में भर्ती हैं। उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक है। पूर्व में उन्हें हर्निया एवं अल्सर ऑपरेशन की सलाह दी गई थी। संजय कश्यप को हृदय संबंधी समस्या होने पर बिलासपुर में उपचार दिया गया।
भर्ती से संबंधित
1316 सहायक शिक्षक पद अब भी लंबित हैं। केवल 1299 अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति मिली। बिना डीएड एवं टीईटी योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई। बजट प्रस्तावित होने के बावजूद योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली। सरकार द्वारा बार-बार भर्ती की घोषणा की गई, लेकिन आज तक कोई नया नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ।
सरकार से प्रमुख मांग
शेष 1316 सहायक शिक्षक पदों पर तत्काल नियुक्ति, हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन और अनशनरत अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य को देखते हुए तत्काल निर्णय लेने की मांग की गई है। आमरण अनशन की शुरुआत अनिश्चितकालीन धरने के रूप में की गई, जिसका उद्देश्य न्यायालय के आदेशों का पालन कराना है।
शांतिपूर्ण विरोध
डीएड अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर कई शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए। इसके तहत “चुप्पी नहीं, न्याय की पुकार” संदेश के साथ मौन धरना दिया गया। वहीं “अंधेरे में भी न्याय की उम्मीद” थीम पर कैंडल मार्च निकालकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया गया।
जनजागरूकता अभियान
अभ्यर्थियों ने जनसमर्थन जुटाने के लिए “एक कप चाय न्याय के नाम” अभियान चलाया। इसके साथ ही सांकेतिक रूप से भीख मांगकर विरोध प्रदर्शन किया गया, ताकि सरकार का ध्यान उनकी मांगों की ओर आकर्षित हो सके।
त्याग और समर्पण
आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने दंडवत प्रणाम यात्रा निकाली और घुटनों के बल चलकर विरोध जताया। महिलाओं ने बाल कटवाकर और पुरुषों ने मुंडन कराकर अपने त्याग और संघर्ष का प्रदर्शन किया।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक माध्यम
अभ्यर्थियों ने धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी अपनी मांगों को उठाया। रामनवमी के अवसर पर कलश यात्रा निकाली गई। इसके अलावा 108 दीप प्रज्वलन, हनुमान चालीसा पाठ और नवकन्या पूजा का आयोजन भी किया गया।
कठोर प्रदर्शन
सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अभ्यर्थियों ने जल सत्याग्रह किया और अंगारों पर चलकर विरोध प्रदर्शन भी किया।
विशेष ऐतिहासिक प्रदर्शन
शहीद दिवस के अवसर पर अभ्यर्थियों ने भगत सिंह और सुखदेव के भेष में सांकेतिक फांसी प्रदर्शन कर अपने संघर्ष को दर्शाया।
दमनात्मक कार्यवाही
आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों को तीन बार जेल भेजा गया। पहली बार 125 अभ्यर्थियों को 4 दिनों तक सेंट्रल जेल में रखा गया। दूसरी बार 6 अभ्यर्थियों पर केस दर्ज कर एक माह का प्रतिबंध लगाया गया। तीसरी बार 25 अभ्यर्थियों को 7 दिनों तक सेंट्रल जेल भेजा गया। इसके बावजूद अभ्यर्थियों का मनोबल अटूट बना रहा।
अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को अपने खून से पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई। उनका कहना है कि यह आंदोलन त्याग, पीड़ा और समर्पण की चरम सीमा को दर्शाता है।
जनसमर्थन और राजनीतिक समर्थन
आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। सत्ता पक्ष के कई जनप्रतिनिधियों ने भी अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन किया है। अभ्यर्थियों के अनुसार, 5 सांसद और 30 से अधिक विधायक भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने की मांग कर चुके हैं।
चेतावनी
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।







