नई दिल्ली (विश्व परिवार)। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि यह मामला केवल धार्मिक परंपरा का नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा पर आधारित नियमों से जुड़ा है।
केंद्र ने दलील दी कि मंदिरों में पूजा-पद्धति और परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं, जिन्हें पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं इस मामले को 9 जजों की संविधान पीठ के सामने रखा गया है, जो इससे जुड़े व्यापक संवैधानिक सवालों पर विचार करेगी।
2018 के फैसले के बाद बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगी रोक को हटाते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था। इसके बाद देशभर में इस मुद्दे पर बहस और विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले।
सुनवाई में उठे प्रमुख सवाल
सुनवाई के दौरान धार्मिक स्वतंत्रता, समानता का अधिकार और परंपराओं की वैधता जैसे कई अहम सवाल उठाए गए। अदालत अब यह तय करेगी कि क्या धार्मिक परंपराएं मौलिक अधिकारों से ऊपर हो सकती हैं या नहीं।
इस मामले में अंतिम फैसला आने के बाद देशभर में धार्मिक स्थलों से जुड़े नियमों पर बड़ा असर पड़ सकता है।





