देशनई दिल्ली

राहुल गांधी का वार: ‘चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है ये बिल’

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। संसद में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन को लेकर कल गुरुवार से ही बहस चल रही है. कल यह बहस रात 1 बजे तक चली और आज शुक्रवार को भी बहस जारी रही. शाम 4 बजे बिल को लेकर वोटिंग होनी है. इससे पहले पीएम कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी दादी की कहानी सुनाई जिसके बाद लोकसभा में स्पीकर ने राहुल गांधी को बोलने से टोका. स्पीकर ने टोकते हुए कहा कि राहुल जी बिल पर बात कीजिए. तब राहुल ने बोला कि सर मैं आपको कहानी सुना रहा हूं. अपनी क्रिएटिविटी का इस्तेमाल कर रहा हूं. सुनिए स्पीकर सर आपको ये कहानी सुनकर मजा आएगा।
पुराना बिल लाइये समर्थन करेंगे
राहुल ने महिला रिजर्वेशन और डिलिमिटेशन पर कहा कि पहला सच तो यह है कि यह महिलाओं का बिल नहीं है. इसका महिलाओं के एम्पावरमेंट से कोई लेना-देना नहीं है. यह भारत के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है. सरकार ओबीसी भाइयों और बहनों को अधिकार देने से बच रही है. कांग्रेस नेता ने दो टूक कहा कि पुराना बिल लाइए तो तुरंत समर्थन देंगे. सरकार को सच्चाई अच्छी नहीं लगती।
‘OBC-दलित को हिंदू कहते हो, अधिकार नहीं देते’
राहुल गांधी ने कहा कि आज मुझे सदन में सच बात कहनी है. पहली सच्चाई ये है कि यह महिलाओं का बिल नहीं है. राहुल गांधी ने महिला आरक्षण बिल को चुनावी नक्शा बदलने की एक कोशिश बताया. राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ‘संविधान से ज्यादा मनुवाद’ में विश्वास रखती है. सरकार अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व छीनने की कोशिश कर रही है. राहुल गांधी ने सरकार पर OBC, दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के साथ ‘क्रूर, बेरहम और निर्मम’ बर्ताव करने का आरोप लगाया. राहुल ने कहा कि OBC-दलित को हिंदू कहते हो, अधिकार नहीं देते।
लोकसभा में बोलते हुए, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा प्रस्ताव महिला सशक्तिकरण बिल नहीं है; उन्होंने कहा कि 2023 में पास हुआ मूल महिला आरक्षण बिल ही असली कानून था. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा कदम का मकसद भारत का चुनावी नक्शा बदलना है. यह भी कहा कि पिछले कानून को लागू करने में सालों की देरी की गई।
राहुल बोले- दलित-ओबीसी भागीदारी खत्म की जा रही
संसद में बोलते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि भारतीय समाज ने दलितों, OBCs और उनकी महिलाओं के साथ कैसा बर्ताव किया. यहां जो करने की कोशिश की जा रही है, वह है जाति जनगणना को दरकिनार करना. यहां वे मेरे OBC भाई-बहनों को सत्ता और प्रतिनिधित्व देने से बचने की कोशिश कर रहे हैं, और उनसे सत्ता छीन रहे हैं. इसपर पलटवार करते हुए किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से पूछा, ‘कांग्रेस ने कभी ओबीसी के लिए काम क्यों नहीं किया. राजीव गांधी ने ओबीसी रिजर्वेशन का विरोध क्यों किया. क्या राहुल गांधी जवाब दे सकते हैं?’
सरकार ने ‘महिला आरक्षण अधिनियम-2023’ लागू किया
सरकार ने गुरुवार देर रात महिलाओं को संसद में 33% आरक्षण देने वाला ‘महिला आरक्षण अधिनियम-2023’ लागू कर दिया. नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह कानून 16 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है. इसे सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित किया गया था।
इसका मतलब है कि संसद में मौजूदा तीनों बिल पास न हों, तो भी लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा. लेकिन यह आरक्षण 2026-27 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक परिसीमन होने के बाद 2034 से ही लागू होगा. महिला आरक्षण को 2029 के चुनाव से ही लागू करने के लिए तीन कानूनों में संशोधन जरूरी है. इन पर लोकसभा में चर्चा जारी है, शाम 4 बजे वोटिंग होगी।

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