नई दिल्ली (विश्व परिवार)। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मंगलवार को राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर आयोजित की गई।
क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग पर बातचीत
दोनों देशों के रक्षामंत्रियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और आपसी सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा की। राजनाथ सिंह यहां एससीओ के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे।
सीमा पर तनाव कम करने पर जोर
उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही भारत-चीन के बीच संवाद को मजबूत करने, सीमा क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और तनाव कम करने के लिए प्रभावी संचार तंत्र को सुदृढ़ बनाने पर भी जोर दिया गया।
मुलाकात को बताया सकारात्मक
चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन से मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि एससीओ बैठक के दौरान यह बातचीत उपयोगी रही। रक्षा विशेषज्ञों ने भी इस मुलाकात को सकारात्मक और रचनात्मक बताया है।
विक्ट्री स्क्वायर पर दी श्रद्धांजलि
इससे पहले, राजनाथ सिंह ने बिश्केक स्थित विक्ट्री स्क्वायर पहुंचकर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की और वीर सैनिकों के बलिदान को नमन किया।
एससीओ बैठक में अहम मुद्दों पर चर्चा
रक्षा मंत्री बिश्केक में एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने पहुंचे हैं, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और सदस्य देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
भारत-चीन संबंधों की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसके बाद संबंधों में गिरावट आई। हालांकि हाल के वर्षों में संबंध सामान्य करने की दिशा में कई पहल की गई हैं।
भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकों से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलता है। साथ ही भारत और चीन के बीच विश्वास बहाली की दिशा में भी सकारात्मक संकेत मिलते हैं। आने वाले समय में इस बातचीत के ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद है।







