रायपुर (विश्व परिवार)। All India Institute of Medical Sciences Raipur के त्वचा रोग विभाग द्वारा Indian Association of Dermatologists, Venereologists and Leprologists Chhattisgarh तथा Dermatoscopy Society of India के सहयोग से 17 मई 2026 को “डर्मोस्कोपी की संभावनाओं को समझना” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
इस शैक्षणिक कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से 70 से अधिक त्वचा रोग विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे यह कार्यक्रम क्षेत्र के प्रमुख शैक्षणिक त्वचा रोग आयोजनों में शामिल हो गया।
कार्यक्रम में Lt Gen Ashok Jindal, कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ, AIIMS रायपुर, Dr Eli Mohapatra, डीन अकादमिक, AIIMS रायपुर, Dr Satyaki Ganguly, विभागाध्यक्ष, त्वचा रोग विभाग, AIIMS रायपुर, Dr Piyush Agarwal, अध्यक्ष, IADVL छत्तीसगढ़ शाखा तथा Dr Soumil Khare, आयोजन सचिव सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने सहभागिता की, जिनमें Dr Balachandra S Ankad, अध्यक्ष, डर्माटोस्कोपी सोसाइटी ऑफ इंडिया, बागलकोट (कर्नाटक) तथा Dr Payal Chauhan, AIIMS जम्मू शामिल रहे। विशेषज्ञों ने डर्मोस्कोपी के बढ़ते उपयोग एवं महत्व पर व्याख्यान दिए तथा व्यावहारिक प्रदर्शन प्रस्तुत किए।
डर्मोस्कोपी एक गैर-आक्रामक (Non-invasive) निदान तकनीक है, जिसके माध्यम से त्वचा, बाल एवं नाखूनों की उन सूक्ष्म संरचनाओं का आवर्धित अवलोकन किया जा सकता है, जो सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देतीं। यह तकनीक विभिन्न त्वचा रोगों के शीघ्र निदान, निगरानी एवं उपचार प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और वर्तमान में त्वचा रोग विशेषज्ञों के लिए एक अनिवार्य उपकरण बन चुकी है।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण हैंड्स-ऑन कार्यशाला सत्र रहा, जिसमें प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में वास्तविक क्लीनिकल मामलों पर डर्मोस्कोप के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण से प्रतिभागियों की निदान क्षमता में वृद्धि हुई, क्लिनिको-पैथोलॉजिकल संबंधों की बेहतर समझ विकसित हुई तथा दैनिक चिकित्सकीय अभ्यास में डर्मोस्कोपी के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा मिला।







