नई दिल्ली (विश्व परिवार)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही एक “हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन” की घोषणा करने वाले हैं। यह एक रणनीतिक राष्ट्रीय पहल है, जिसका मकसद पड़ोसी देशों – खासकर बांग्लादेश और म्यांमार – से सीमावर्ती राज्यों में होने वाले घुसपैठ पर रोक लगाना है, और साथ ही पूरे देश में हो रहे कृत्रिम जनसांख्यिकीय बदलावों को भी संबोधित करना है।
सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा आयोजित वार्षिक रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश को नक्सलवाद से मुक्त कराने के बाद, अब हमारा ध्यान उस घुसपैठ को रोकने पर होना चाहिए जो वर्षों से जारी है। “अब वह समय आ गया है जब उस घुसपैठ कार्यक्रम को रोका जाए जो सालों से बिना किसी रोक-टोक के चल रहा है। कई रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों ने मुझसे कहा था कि मैं ‘नक्सल-मुक्त अभियान’ शुरू न करूँ। उन्होंने प्रधानमंत्री से भी यही बात कही थी। लेकिन भारत सरकार अपने फ़ैसले पर अडिग रही।”
“पाँच दशक पुरानी एक समस्या अब खत्म हो रही है, और भारत अब नक्सल-मुक्त हो चुका है। अब BSF को भी घुसपैठ से निपटने के लिए उसी दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। प्रधानमंत्री ने ‘हाई पावर डेमोग्राफ़ी मिशन’ की शुरुआत की है, जिसकी घोषणा कुछ ही दिनों में की जाएगी।”
शाह ने कहा कि ‘हाई पावर डेमोग्राफ़ी मिशन’ के तहत BSF और सीमा सुरक्षा बल के जवानों को घुसपैठ के संभावित ठिकानों (identified points) की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
PM मोदी द्वारा मिशन की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफ़ी मिशन’ की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ और अवैध प्रवासन के कारण पैदा हुए ‘जनसांख्यिकीय असंतुलन’ से उत्पन्न होने वाले ख़तरों पर प्रकाश डाला।
इस मिशन का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी इस चुनौती से निपटना है, साथ ही भारत के नागरिकों की एकता, अखंडता और अधिकारों की रक्षा करना भी है।
‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफ़ी मिशन’ क्या है?
‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफ़ी मिशन’ एक बेहद महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य अवैध घुसपैठ की लगातार बनी रहने वाली चुनौती से निपटना है। इसकी सफलता मुख्य रूप से सीमा पर बेहतर बाड़बंदी और निगरानी, ’विदेशी न्यायाधिकरणों’ (Foreigners Tribunals) द्वारा त्वरित निर्णय, देशों के बीच मज़बूत वापसी समझौतों (repatriation agreements), और एक सुदृढ़ ‘राष्ट्रीय पहचान प्रणाली’ पर निर्भर करेगी।
प्रभावित राज्यों की होगी बैठक
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वह जल्द ही मंत्रालय में प्रभावित राज्यों – त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल – के साथ एक बैठक करेंगे। इस बैठक का उद्देश्य घुसपैठ को रोकने के लिए एक सुरक्षा ढाँचा तैयार करने हेतु एक ‘एकीकृत रणनीति’ बनाना होगा।
उन्होंने कहा, “अब त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकारें हैं, जो अपनी नीति के तौर पर यह मानती हैं कि देश में किसी भी तरह की घुसपैठ नहीं होनी चाहिए।” “आने वाले दिनों में, हम गृह मंत्रालय में तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक बैठक करेंगे, और घुसपैठ को रोकने के लिए हम सुरक्षा की एक मज़बूत परत तैयार करेंगे।”
इस बीच, गृह मंत्री शाह ने बीएसएफ से यह भी आग्रह किया कि वे सिर्फ़ सीमा पर ही ध्यान न दें, बल्कि “अब हमें ज़िला कलेक्टर से लेकर पटवारी तक, और पुलिस अधीक्षक से लेकर पुलिस थाना प्रभारी तक—सभी से संपर्क साधना चाहिए; और उनसे मिली सभी जानकारियों का इस्तेमाल करते हुए, हमें घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए एक सुचारू व्यवस्था भी बनानी चाहिए।”
उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकार अगले साल एक “स्मार्ट बॉर्डर” परियोजना शुरू करेगी, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ लगने वाली 6,000 किलोमीटर लंबी सीमा पर सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इस परियोजना का लक्ष्य सीमावर्ती क्षेत्रों को घुसपैठ-मुक्त बनाना और वहाँ की जनसांख्यिकीय संरचना (demographic composition) को बदलने के किसी भी प्रयास को विफल करना है।







