रायपुर (विश्व परिवार) प्रायः सभी कवियों ने माँ पर कविताएँ लिखी हैं। जीवन में माँ के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। हिंदी साहित्य में पिता पर कुछ कम लिखा गया है। इस कमी को पूरा करने का प्रयास किया है छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय कवि राजेश जैन राही ने, पिता को समर्पित अनूठे 401 दोहे लिखकर। राही द्वारा लिखित दोहा कृति ‘‘पिता छाँव वट वृक्ष की‘‘ एक कवि द्वारा पिता पर लिखे गये सर्वाधिक दोहों के लिये गोल्डन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड्स में भी शामिल हो गयी है। प्रत्येक दोहे में पिता या पर्यायवाची शब्द को श्री राही ने बेहद ख़ूबसूरती से पिरोया है। उनके दोहों में विविधता है। पिता के गहन प्रेम को उन्होंने इस प्रकार परिभाषित किया है –
सागर सा मुझको लगे, पिता आपका प्यार।
उपर कुछ खारा मगर, अंदर रतन हजार।।
पिता अक्सर अपने प्यार को अभिव्यक्त नहीं कर पाते। श्री राही ने इस तथ्य को इस प्रकार लिखा है-
रिश्तों की इस भीड़ में, अपना जाने कौन,
पिता हमेशा साथ हैं, दिखते बेशक मौन।
पिता द्वारा दिये गये संस्कार जब फलित होते हैं तब सहज ही ऐसी अभिव्यक्ति होती है –
सपनों को मिलने लगा, मनचाहा विस्तार,
बाबू जी के पाठ का, गहरा था आधार।
राही जी पिता से भी कुछ अपेक्षाएं रखते हैं यथा –
बाबू जी समभाव से, अवसर देना ख़ास,
शायद बेटी ही रचे, एक नया इतिहास।
बापू बनो उदाहरण, छोड़ो भी उपदेश,
मिल जायेगा आप ही, बच्चों को संदेश।
वर्तमान परिवेश में पिता की उपेक्षा पर राही लिखते हैं –
कमरा सीढ़ी छत सभी, बँटने को तैयार।
बोझ हुए माँ-बाप ही, कौन करे स्वीकार।।
आशावादी कवि राजेश जैन राही इस दोहे के साथ अपनी चाहत का उल्लेख करते हैं –
नौजवान भटकें नहीं, हम सबका है फ़र्ज़,
याद रहें माता-पिता, मातृभूमि का कर्ज़।
राजेश जैन राही के ये दोहे बेहद प्रासंगिक लगते हैं उनका यह लेखन युवा एवं वरिष्ठ पीढ़ी दोनों के लिये समान रूप से उपयोगी लगता है। श्री राही ने इस लेखन से काव्य जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है।
कृति के तीसरे संस्करण का विमोचन 23 अप्रैल को कलेक्टर, रायपुर गौरव कुमार सिंह के कर कमलों से रायपुर में संपन्न हुआ।







