रायपुर (विश्व परिवार)। एम्स रायपुर के न्यूरोसर्जरी विभाग द्वारा न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में राष्ट्रीय क्रेनियोवर्टिब्रल जंक्शन (CVJ) सर्जरी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला संस्थान के एनाटॉमी विभाग की अत्याधुनिक कैडैवरिक लैब में आयोजित की गई, जिसमें देशभर से वरिष्ठ न्यूरोसर्जन, विशेषज्ञ चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर एवं प्रतिभागियों ने भाग लिया। क्रेनियोवर्टिब्रल जंक्शन (CVJ) शरीर का वह अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जहां मस्तिष्क रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से से जुड़ता है। इस क्षेत्र में सांस लेने, शरीर की गतिविधियों, संतुलन तथा अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करने वाली नसें और रक्त वाहिकाएं होती हैं। इस क्षेत्र में होने वाली छोटी-सी समस्या भी गर्दन में तेज दर्द, हाथ-पैरों में कमजोरी, चलने-फिरने में कठिनाई, निगलने में परेशानी तथा कई बार जानलेवा
न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं का कारण बन सकती है।
इस क्षेत्र की सर्जरी अत्यंत जटिल होती है, जिसके लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक, विशेष उपकरण और गहन प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। आधुनिक इमेजिंग, सर्जिकल नेविगेशन तथा मिनिमली इनवेसिव तकनीकों ने ऐसे ऑपरेशनों के परिणामों में काफी सुधार किया है। इसलिए न्यूरोसर्जनों के लिए निरंतर प्रशिक्षण और कौशल विकास अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला में विशेषज्ञ व्याख्यान, जटिल मामलों पर चर्चा, पैनल डिस्कशन तथा कैडैवरिक (मानव शरीर संरचना आधारित) डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को आधुनिक सर्जिकल तकनीकों, उपकरणों के उपयोग, ऑपरेशन की पूर्व योजना तथा जटिल CVJ रोगों के उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने किया। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर उन्नत न्यूरोसर्जरी शिक्षा एवं प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। इस प्रकार की राष्ट्रीय कार्यशालाएं और सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम मध्य भारत में विश्वस्तरीय न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने के साथ-साथ मरीजों को अपने ही क्षेत्र में नवीनतम एवं प्रमाण- आधारित उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यशाला के आयोजक एवं न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के बीच की दूरी को कम करना है। उन्होंने बताया कि क्रेनियोवर्टिब्रल जंक्शन की सर्जरी के लिए शरीर रचना विज्ञान की गहरी समझ, सूक्ष्म योजना और उच्च तकनीकी दक्षता आवश्यक होती है। ऐसे कार्यक्रम युवा न्यूरोसर्जनों को देश के अनुभवी विशेषज्ञों से सीखने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते हैं।
एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. सौमित्र त्रिवेदी ने कहा कि यह कार्यशाला युवा न्यूरोसर्जनों को विशेषज्ञों से सीधे सीखने का अनूठा अवसर प्रदान करती है। एम्स रायपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी. के. त्रिपाठी ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं वर्तमान समय की आवश्यकता हैं। संस्थान के अन्य वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यशाला में एसजीपीजीआई, लखनऊ के प्रो. अरुण कुमार श्रीवास्तव तथा एम्स भोपाल के प्रो. आदेश श्रीवास्तव सहित देश के कई प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जनों ने भाग लिया। उन्होंने जन्मजात विकृतियों, चोटों, उम्र संबंधी रोगों, ट्यूमर, रक्त वाहिकाओं की समस्याओं तथा क्रेनियोवर्टिब्रल जंक्शन की अस्थिरता जैसे जटिल मामलों के उपचार में अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने कठिन मामलों में सही निर्णय लेने, सर्जरी के दौरान होने वाली जटिलताओं से बचने तथा प्रमाण-आधारित उपचार पद्धतियों पर भी विस्तृत चर्चा की।
कार्यशाला का समापन अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। देशभर से आए न्यूरोसर्जनों, ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जनों, रेजिडेंट डॉक्टरों एवं फेलोज़ ने इस कार्यक्रम की सराहना की। प्रतिभागियों ने देश के अग्रणी विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया, जटिल मामलों पर चर्चा की तथा व्यावहारिक निर्णय लेने की तकनीकों को समझने का अवसर प्राप्त किया।







