नई दिल्ली (विश्व परिवार)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने बुधवार को योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण एवं पुनरुद्धार परियोजना का संयुक्त रूप से शुभारंभ किया। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल यह मंदिर परिसर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। भगवान शिव को समर्पित यह ऐतिहासिक स्थल भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है।
पीएम मोदी का संबोधन
परियोजना के शुभारंभ अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उनके जीवन का सौभाग्य है कि उन्हें भगवान शिव से जुड़े पवित्र स्थलों की सेवा और संरक्षण का बार-बार अवसर मिला है। उन्होंने वडनगर के हाटकेश्वर महादेव, सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ और महाकाल के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि अब 1000-1200 वर्ष पुरानी इस महान धरोहर के पुनरुद्धार कार्य का शुभारंभ करना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”चाहे ल्हासा से कैलाश मानसरोवर की यात्रा हो या इंडोनेशिया का पवित्र प्रम्बानन मंदिर, हर स्थान पर महामृत्युंजय मंत्र और ‘ॐ नमः शिवाय’ का उच्चारण सुनाई देता है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य अत्यंत भावुक करने वाला था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्व धरोहर स्थल के रूप में इस भव्य मंदिर परिसर के पुनरुद्धार के बाद बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन के लिए आएंगे।”
उन्होंने इंडोनेशिया की जनता और यहां के शासकों का इस विरासत को संरक्षित रखने के लिए आभार व्यक्त किया।
भविष्य की उम्मीद
पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि पुनरुद्धार परियोजना 2029 से पहले पूरी हो जाएगी और इसके बाद बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु और पर्यटक यहां आएंगे। उन्होंने भगवान शिव से भारत-इंडोनेशिया की मित्रता को और मजबूत करने तथा दोनों देशों के कल्याण की प्रार्थना की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रम्बानन मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय सांस्कृतिक विरासत की सबसे महत्वपूर्ण पहचान है, जहां भगवान शिव, मां दुर्गा और भगवान गणेश की पूजा सदियों से होती रही है।यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।







