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समाधान योजना में बिजली के न्यायालयीन प्रकरणों का भी होगा त्वरित निराकरण

  • न्यायालय से प्रकरण वापस लेकर पात्र उपभोक्ता उठा सकेंगे योजना का लाभ

रायपुर (विश्व परिवार)। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के अंतर्गत अब न्यायालयों में लंबित बिजली बिल संबंधी प्रकरणों का भी निराकरण किया जाएगा। इसके लिए उपभोक्ताओं को न्यायालयों में लंबित प्रकरण वापस लेना होगा।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने बताया कि उपभोक्ताओं से मिल रहे उत्साहजनक प्रतिसाद को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही अब योजना का दायरा बढ़ाते हुए न्यायालयों में लंबित बिजली बिल संबंधी प्रकरणों को भी इसमें शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि जिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल संबंधी प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं, वे न्यायालय से अपना प्रकरण वापस लेकर योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकते हैं। नियमानुसार आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद उन्हें उपलब्ध छूट एवं अन्य लाभ प्रदान किए जाएंगे। प्रबंध निदेशक श्री कंवर ने पात्र उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने निकटतम वितरण केंद्र अथवा संबंधित कार्यालय से संपर्क कर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें तथा निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर योजना का लाभ उठाते हुए अपने बिजली बिल संबंधी लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण कराएं।
मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 के तहत निम्नदाब घरेलू, बीपीएल एवं कृषि श्रेणी के अशासकीय उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल की मूल राशि एवं अधिभार में नियमानुसार छूट का लाभ प्रदान किया जा रहा है। अब तक 8 लाख 61 हजार 38 सक्रिय उपभोक्ताओं का पंजीयन हुआ है, जिन पर 1,493 करोड़ रुपये की कुल बकाया राशि थी, उन्हें कुल 745.61 करोड़ रुपये की छूट प्रदान की गई है तथा 85.22 करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ है। वहीं 1 लाख 42 हजार 799 उपभोक्ताओं ने अपने प्रकरणों का संपूर्ण समाधान प्राप्त किया, जिनके लिए मूल राशि में 28.28 करोड़ रुपये तथा अधिभार में 50.60 करोड़ रुपये की छूट दी गई और 58.96 करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ।
इसके अतिरिक्त 3.58 लाख निष्क्रिय उपभोक्ताओं को मूल राशि में 124.31 करोड़ रुपये तथा अधिभार में 40.76 करोड़ रुपये, अर्थात कुल 165.07 करोड़ रुपये की छूट प्रदान की गई तथा उनसे 2.52 करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ। पूर्व में यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील थी। योजना की अवधि बढ़ने से ऐसे पात्र उपभोक्ताओं को तीन माह का अतिरिक्त अवसर मिलेगा, जो अब तक किसी कारणवश इसका लाभ नहीं ले सके हैं।

 

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