नई दिल्ली (विश्व परिवार)। भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल वनों के प्रशासक नहीं, बल्कि भारत की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षक भी हैं। उन्होंने कहा कि समाज को वनों की सुरक्षा के कार्य में भागीदार बनाने से संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी और दीर्घस्थायी बनेंगे।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में वनों की अहम भूमिका
प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के ह्रास जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने में वन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय वन सेवा के अधिकारियों का योगदान केवल भारत की पर्यावरणीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सतत विकास के वैश्विक प्रयासों को भी मजबूती देगा। उन्होंने युवा अधिकारियों को वन क्षेत्र के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
विकास और संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी
राष्ट्रपति ने कहा कि वनों और उनके आसपास रहने वाले लोगों की वैध आकांक्षाओं के साथ संतुलन बनाते हुए पारिस्थितिक संरक्षण को आगे बढ़ाना चाहिए। विकास और संरक्षण को एक-दूसरे के विरोधी लक्ष्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे समाधान विकसित करने का आह्वान किया, जिनसे प्रकृति और स्थानीय समुदाय दोनों का समान रूप से विकास हो सके।
जनभागीदारी बढ़ाने पर दिया जोर
राष्ट्रपति मुर्मु ने संरक्षण, वन-पुनर्स्थापन और सतत आजीविका से जुड़ी पहलों में जनभागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों, वनवासियों, महिलाओं, किसानों और स्थानीय संस्थाओं के विचारों एवं चिंताओं को समझने से अधिकारियों को महत्वपूर्ण दृष्टिकोण मिलेगा। समाज को वनों की सुरक्षा के कार्य में भागीदार बनाने से संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी और दीर्घस्थायी बनेंगे।
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में निभाएंगे अहम भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि लोक सेवा का मूल उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना है। वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पारिस्थितिक सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारी भारत की विकास यात्रा को हरित, समावेशी और सतत बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
दो बैचों के 242 प्रशिक्षु ले रहे हैं प्रशिक्षण
वर्तमान में भारतीय वन सेवा के वर्ष 2024 और 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वर्ष 2024 बैच में 111 और वर्ष 2025 बैच में 131 प्रशिक्षु अधिकारी हैं। दोनों बैचों में भूटान के दो-दो प्रशिक्षु अधिकारी भी शामिल हैं।







