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मूसलाधार बारिश के बीच पुरी रथयात्रा, जलजमाव के बावजूद नहीं डिगी श्रद्धालुओं की आस्था

पुरी (विश्व परिवार)। पवित्र रथ यात्रा उत्सव के बीच तीर्थ नगरी पुरी में हो रही मूसलाधार बारिश ने प्रशासन और भक्तों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. लगातार जारी भारी बारिश के कारण पुरी के मुख्य मार्ग यानी ‘बड़ दांड’ के कई हिस्सों में पानी जमा हो गया है. हालांकि, मौसम की इस बेरुखी और असुविधा के बावजूद महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए आए लाखों श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था में रत्ती भर भी कमी देखने को नहीं मिल रही है. भक्त भारी बारिश में भीगते हुए जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ रथों के आगे डटे हुए हैं।
ड्रेनेज सिस्टम फेल, पुरी नगर पालिका के लिए बड़ी चुनौती
लगातार हो रही वर्षा के कारण शहर की ड्रेनेज व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया है, जिसके चलते कई प्रमुख स्थानों पर घुटनों तक पानी भर गया है. रथ यात्रा जैसे महा-आयोजन के समय इस तरह का जलजमाव होना पुरी नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है. अगर समय रहते पानी नहीं निकाला गया, तो रथों को खींचने और भक्तों की सुरक्षा में बाधा आ सकती है।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा: 150 से अधिक कर्मचारी और 15 हाई-कैपेसिटी पंप तैनात
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुरी जिला प्रशासन और नगर पालिका तुरंत एक्शन मोड में आ गए हैं. बड़ा दांड और मंदिर के आस-पास के वीआईपी रोड से पानी की त्वरित निकासी के लिए युद्ध स्तर पर कार्य शुरू कर दिया गया है:
राहत कार्य में जुटे कर्मचारी: जलजमाव वाले स्थानों से कचरा हटाने और नालों को चालू रखने के लिए 150 से अधिक सफाई और तकनीकी कर्मचारियों को चौबीसों घंटे ड्यूटी पर तैनात किया गया है।
हाई-टेक पंपों का इस्तेमाल: सड़कों पर जमा पानी को तेजी से खींचने के लिए 15 से अधिक आधुनिक एवं उच्च क्षमता वाले सक्शन पंप लगाए गए हैं. इन पंपों की मदद से भारी मात्रा में पानी को मुख्य सड़क से हटाकर सुरक्षित ड्रेनेज चैनलों में भेजा जा रहा है।
आस्था के आगे प्रशासन नतमस्तक: इस संकटपूर्ण स्थिति में भी भक्तों का अटूट विश्वास देखते ही बनता है. प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को कोई गंभीर असुविधा न हो और रथ खींचने की रस्म बिना किसी रुकावट के पूरी की जा सके. बारिश के बीच भी स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारी और आपदा प्रबंधन की टीमें दिन-रात ग्राउंड जीरो पर काम कर रही हैं।

 

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