दिल्ली (विश्व परिवार)। नीट पेपर लीक को लेकर पूरे देश में संग्राम मचा हुआ है। एक तरह, जहां कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी पिछले 34 दिन ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना है। वहीं दूसरी तरफ समाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 24 दिन से भूख हड़ताल पर है। संसद के मानसून सत्र में भी सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसद आमने-सामने हैं। नीट पेपर लीक और छात्रों के प्रोटेस्ट पर लाठीचार्ज को लेकर दोनों पक्ष के सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर रहे हैं। पहले ही नीट पेपर लीक को लेकर मुसीबत में फंसी मोदी सरकार की मुसीबत बढ़ाने अब अन्ना हजारे आ गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने सीजेपी प्रोटेस्ट को समर्थन देने का ऐलान किया है।
अन्ना हजारे ने अहिल्यानगर में चल रहे छात्रों के आंदोलन में हिस्सा लेने का फैसला किया है। अन्ना हजारे के करीबी सहयोगियों ने बताया कि वो जल्द ही अहिल्यानगर पहुंचकर छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होंगे और उनके मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
वहीं छात्रों के आंदोलन पर अन्ना हजारे ने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के एक बड़े और सम्मानित नेता हैं। उन्हें ये समझना चाहिए कि हिंसा कोई रास्ता नहीं है। वह सर्वोच्च पद पर हैं, इसलिए मैंने उन्हें पत्र लिखा है। सांसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए एक्शन पर कहा कि हिंसा से कभी कोई समाधान नहीं निकलता। मैंने अपने जीवन में 22 आंदोलन किए, लेकिन उनमें कभी हिंसा नहीं हुई। इस आंदोलन में जो हुआ, वह गलत हुआ। आंदोलन हमेशा अहिंसा के मार्ग पर होना चाहिए।
सरकार सेवक, उसे जनता के पास जाना चाहिए
अन्न हजारे ने कहा कि सरकार क्या कर रही है… इस पर मैं कुछ नहीं बोलूंगा, लेकिन जो कुछ हुआ, वह बिल्कुल सही नहीं हुआ। जो दोषी हैं, वे दोषी हैं. उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग पर बोलते हुए अन्ना ने कहा कि जनता मालिक है। सभी अधिकारी और सरकार जनता के सेवक हैं। जो गलत है, वह गलत है। इस देश में जनता ही सर्वोच्च है। सरकार जो कर रही है, वह गलत है। सरकार सेवक है और उसे जनता के पास जाना चाहिए।
गांधीवादी तरीके से हो समाधान
अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वो जनता की आवाज को राजनीतिक विरोधियों की आवाज न समझें। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि वह गांधीवादी सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करते हुए प्रदर्शनकारियों की बात धैर्यपूर्वक सुने। उन्होंने कहा कि 20 जून से शुरू हुए कॉकरोच जनता पार्टी के इस आंदोलन को दबाने के बजाय सरकार को छात्रों के साथ भरोसेमंद और रचनात्मक संवाद स्थापित करना चाहिए।
छात्रों के प्रदर्शन में कार्रवाई दुखद
बता दें कि इससे पहले अन्ना हजारे ने दिल्ली में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर दुख जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। अन्ना ने पत्र में कहा कि लोकतंत्र में टकराव की जगह संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और मंत्री के इस्तीफे से सरकार कमजोर नहीं बल्कि अधिक जवाबदेह बनेगी। अन्ना हजारे ने कहा कि किसी घोटाले या गड़बड़ी पर केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर जवाबदेही तय कर देना गलत है। जब अच्छे कामों का श्रेय सरकार लेती है तो शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को भी विफलता की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।







