छत्तीसगढ़

तीजा मिलन महोत्सव में बिखरी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की रंगत, मातृशक्ति की एकजुटता ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा

खरोरा (विश्व परिवार)। ग्राम सिलयारी कुरूद में आयोजित भव्य तीजा मिलन महोत्सव में जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा एवं पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल के साथ सम्मिलित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। तीज मिलन महोत्सव में बड़ी संख्या में क्षेत्र की मातृशक्ति एवं ग्रामीणजन उत्साह और उमंग के साथ शामिल हुए। इस दौरान पूरे आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और तीजा-पोरा की परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तीज पर्व की खुशियां साझा कीं। आपसी मेल-मिलाप, प्रेम और भाईचारे से सराबोर इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। तीजा-पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि परिवार, समाज और रिश्तों में प्रेम, स्नेह एवं आत्मीयता को मजबूत करने वाला पर्व भी है।

इस अवसर पर नवीन अग्रवाल ने कहा कि “तीजा-पोरा छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जिसमें हमारी लोक संस्कृति, परंपरा, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव की सुंदर झलक दिखाई देती है। तीज मिलन जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विशेष रूप से मातृशक्ति की सहभागिता इस पर्व को और अधिक गरिमामय बनाती है। हमारी माताएं और बहनें छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं परंपराओं की सच्ची संवाहक हैं। उनके सम्मान और सशक्तिकरण के साथ ही समाज और प्रदेश की वास्तविक प्रगति संभव है।”

उन्होंने आगे कहा कि “आज आवश्यकता है कि हम आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों और अपनी लोक परंपराओं से भी जुड़े रहें। तीजा-पोरा जैसे पर्व हमें अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और अपने संस्कारों से जोड़ते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और एकजुटता की भावना और मजबूत होती है।”

महोत्सव में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  संदीप यदु क्षेत्र के सम्मानित जनप्रतिनिधिगण, भाजपा पदाधिकारीगण, कार्यकर्ता साथी एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रहीं। सभी ने एक-दूसरे को तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं और हर्षोल्लास के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं।

आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और लोक जीवन से जुड़ी गतिविधियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष रूप से जीवंत बना दिया।

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