- हमारे कर्तव्य एवं अधिकारों पर मुनि श्री के मंगल प्रवचन
राघौगढ़ (विश्व परिवार)। संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक तपस्वी शिष्य बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज की धर्मनगरी राघौगढ़ में चल रही श्रमण धारा प्रवचन श्रृंखला में महाराज जी ने कर्तव्य एवं अधिकारों का बोध कराते हुए मंगल प्रवचन दिए। महाराज जी ने कहा हर व्यक्ति अधिकारों की ओर भाग रहा है। उसे अपने कर्तव्यों का ध्यान नहीं है या कर्तव्यों की अनुदेखी कर रहा है। अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ हमें दैनिक जीवन में ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। परिवार में जो बड़ा होता है उसे अधिकार होता है मगर वह यह भी जानता है कि परिवार में उससे छोटे जो है उनके प्रति उसका क्या कर्तव्य है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती है हमारे अधिकार भी बढ़ते जाते हैं जिस गति से अधिकार बढ़ते हैं इस गति से हमें कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। जो उम्र में बड़ा है तथा उसमें बड़प्पन है वह बड़ा कहलाता है। मगर जो बड़ा है मगर उसमें बड़प्पन नहीं है, उसे हम बड़े वाले कहते हैं। बड़े वाले हर गांव में, शहर में मिल जाएंगे। जो अधिकार पूर्वक अपनी दादागिरी करते हैं उन्हें कर्तव्य का बोध नहीं होता है। हमें अपनी दृष्टि कर्तव्यों पर रखना चाहिए अधिकारों पर नहीं। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने इस विषय पर प्रवचन करते हुए कहा आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज हमेशा कहते थे जिसे सहन करना आ गया, वह बड़ा बन गया। आपने कहा इस युग के प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव थे, उनके पुत्र भरत चक्रवर्ती प्रथम चक्रवर्ती थे। जिनके नाम से इस देश का नाम भारतवर्ष है।उनके सेनापति जयकुमार ने सुलोचना के साथ स्वयंवर में विवाह रचाया था। यह स्वयंवर इस सदी का प्रथम स्वयंवर था। स्वयंवर और प्रेम विवाह में आपने अंतर बताया। स्वयंवर में युवती अनेकों वरों में अपना वर पसंद कर वरमाला डाल देती थी। जिसके गले मैं वरमाला डालकर अपना पति स्वीकार करती है उस युवक से स्वयंवर से पहले उसका कभी परिचय नहीं होता है। वर्तमान में प्रेम विवाह का स्वरूप विकृत हो गया है। लड़के लड़की के बीच मोबाइल के माध्यम से पहचान बढ़ती है और वह पहचान प्रेम विवाह के रूप में बदल जाती है प्रेम विवाह के दुष्परिणाम यह होते हैं कि जल्दी ही संबंध विच्छेद हो जाती है।
धर्म सभा में घोषणा की गई थी 26 जुलाई रविवार को प्रातः 6:45 बजे मुनि श्री के सानिध्य में एवं मार्गदर्शन में युवक युवतियों की जो मोटिवेशन क्लास चल रही है उस क्लास में कक्षा 8 से ऊपर के सभी छात्र-छात्राओं को आमंत्रित किया है। उन्हें मार्गदर्शक प्रेरणा मुनि श्री देंगे। प्रातः 8 बजे मुनि संघ के पावन सानिध्य में विद्यासागर भवन में मुनि श्री के पावन सानिध्य में आचार्य विद्यासागर दिगंबर जैन पाठशाला के नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा संगीतमय सामूहिक पूजन आचार्य विद्यासागर जी महाराज की होगी ।तत्पश्चात प्रातः 8:30 बजे से मुनि श्रमण सागर जी महाराज के श्रवण धारा प्रवचन माला पर मंगल प्रवचन होंगे।







