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एम्स रायपुर में OST केन्द्रों के सुदृढ़ीकरण हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

रायपुर (विश्व परिवार) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के मनोचिकित्सा विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति (CGSACS) के सहयोग से राज्य के वर्तमान में संचालित आठ ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (Opioid Substitution Therapy-OST) केन्द्रों को व्यापक नशा मुक्ति केन्द्रों (De-addiction Facilities) के रूप में विकसित एवं सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन लेफ्टिनेंट जनरल अशोक कुमार जिंदल (सेवानिवृत्त), कार्यपालक निदेशक, एम्स रायपुर ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एली महापात्र, अधिष्ठाता, एम्स रायपुर ने की। इस अवसर पर डॉ. लोकेश कुमार सिंह, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, मनोचिकित्सा विभाग; डॉ. आदित्य सोमानी, सह प्राध्यापक; डॉ. लक्ष्मी निरिसा पी., सहायक प्राध्यापक; तथा डॉ. विनीत पटेल, सहायक प्राध्यापक, मनोचिकित्सा विभाग, एम्स रायपुर उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ शासन की ओर से डॉ. खेमराज सोनवानी, अतिरिक्त परियोजना संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति (CGSACS); विक्रांत वर्मा, उपसंचालक (प्रिवेंशन ब्रांच एवं PMR); हितेश माहेश्वरी, सहायक संचालक (प्रिवेंशन ब्रांच); तथा केशव पाण्डेय, संभागीय सहायक (प्रिवेंशन ब्रांच) कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इसके अतिरिक्त CGSACS के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने राज्य में नशा मुक्ति सेवाओं को सुदृढ़ बनाने हेतु विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में अनेक नशा मुक्ति केन्द्र सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में संचालित आठ OST केन्द्र मुख्यतः इंजेक्शन के माध्यम से नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले व्यक्तियों को सेवाएँ प्रदान करते रहे हैं, जिनमें एचआईवी/एड्स तथा अन्य रक्तजनित संक्रमणों का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है। अब इन केन्द्रों का विस्तार करते हुए इन्हें व्यापक नशा मुक्ति सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, ताकि ओपिऑयड निर्भरता के साथ-साथ अन्य प्रकार के मादक पदार्थों की लत से ग्रसित व्यक्तियों को भी समग्र उपचार, परामर्श, मनोसामाजिक सहयोग एवं पुनर्वास सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।
अपने उद्घाटन संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल अशोक कुमार जिंदल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि मादक पदार्थों की लत केवल चिकित्सीय समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नशे की समस्या से जूझ रहे अनेक लोगों तक उपचार सेवाएँ नहीं पहुँच पा रही हैं, जिसके कारण उपचार आवश्यकता एवं उपलब्ध उपचार सेवाओं (Treatment Gap) के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। इस अंतर को कम करने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों, शासन एवं समाज के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि एम्स रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य में
नशा मुक्ति सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु तकनीकी मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ सहयोग तथा अकादमिक समर्थन निरंतर उपलब्ध कराता रहेगा, जिससे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ उपचार सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जा सके।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में आठ OST केन्द्र संचालित हैं। इन केन्द्रों से लगभग 50 प्रतिभागी, जिनमें चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, काउंसलर, डेटा मैनेजर तथा एएनएम (Auxiliary Nurse Midwives) शामिल हैं, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा नशा मुक्ति उपचार, ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (OST), मनोसामाजिक परामर्श, रोगी प्रबंधन, अभिलेख संधारण तथा उपचार सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार जैसे विभिन्न विषयों पर व्याख्यान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह पहल छत्तीसगढ़ शासन एवं एम्स रायपुर के मध्य एक अभिनव सहयोग का उदाहरण है तथा देश में अपनी तरह के अग्रणी प्रयासों में से एक है। इस अवसर पर मनोचिकित्सा विभाग, एम्स रायपुर ने जानकारी दी कि राज्य में नशा मुक्ति सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने के उद्देश्य से भविष्य में भी ऐसे क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे। इन पहलों का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता में वृद्धि करना तथा पूरे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, सुलभ एवं सतत नशा मुक्ति सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित करना है।

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