रायपुर (विश्व परिवार)। भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की अमर रचना है। वर्ष 1913 में उन्हें साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। विश्वख्याति प्राप्त महान साहित्यकार एवं शिक्षाविद गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर श्रद्धा एवं सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर नीलांजना जैन ने गुरुदेव के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर केवल महान कवि ही नहीं, बल्कि दार्शनिक, संगीतज्ञ, शिक्षाविद और मानवतावादी विचारक भी थे।
उन्होंने करीब 2000 गीतों की रचना की। उन्होंने शिक्षा को प्रकृति के सानिध्य से जोड़ते हुए ऐसी शिक्षा व्यवस्था की कल्पना की, जिसमें विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो। प्रकृति से जुड़ी उनकी रचनाओं में स्पष्ट सरलता दिखाई देती है। उनकी कविताओं और गीतों में वृक्ष, नदियां, ऋतुएं, पक्षी और प्राकृतिक सौंदर्य का सजीव वर्णन मिलता है, जो मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे भारतीय संबंध को स्थापित करता है।
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य जगत में नोबेल पुरस्कार तथा उनकी कालजयी कृति ‘गीतांजलि’ के लिए विशेष रूप से याद किया गया। कार्यक्रम में उनके योगदान को नमन करते हुए पुष्प अर्पित किए गए।
राष्ट्रगान भारत की एकता, अखंडता, विविधता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। विद्यार्थियों से गुरुदेव के आदर्शों—मानवता, प्रकृति प्रेम, ज्ञानार्जन, सृजनशीलता एवं राष्ट्रप्रेम—को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर संस्था की शिक्षिका तृप्ति भारती ने वृक्षों की सुरक्षा के लिए 10,000 रुपये देने की घोषणा की।
कार्यक्रम में शशिकला वर्मा, अमृता यादव, उपाध्याय कौशिक,ज्योति वर्मा, अनिता ठाकुर, दीप्तिरानी, रेखा साई, मेटेश्वरी साई, आकाश बंजारे, धनेश यादव, लखोट बरेठ सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।







