नई दिल्ली (विश्व परिवार)। लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और देश में अराजकता पैदा करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी की राजनीतिक ताकत पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति का भी जिक्र किया।
रायबरेली सीट पर सीधा सवाल
रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी से पूछा, “क्या समाजवादी पार्टी के समर्थन के बिना कांग्रेस रायबरेली में अपनी सीट भी जीतने की क्षमता रखती है?” उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में पिछले 37 वर्षों से सत्ता से बाहर है।
‘रिजीम चेंज’ के शब्दों पर निशाना
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है। इससे साफ है कि विपक्ष की लड़ाई चुनाव सुधार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी कवायद के पीछे देश में अस्थिरता पैदा कर सत्ता हासिल करने की साजिश है। कांग्रेस और उसके सहयोगी युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के बजाय नकारात्मक गतिविधियों में लगा रहे हैं।
आपातकाल और संविधान का जिक्र
रक्षा मंत्री ने कांग्रेस के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा, “मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि 1975 में इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र को सलाखों के पीछे डाल दिया था। उन्होंने लोकतंत्र को कैद कर लिया था। आज राहुल गांधी संविधान को अपनी जेब में रखकर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस के इतिहास के पन्ने पलटकर देखिए, आपको कई काले अध्याय मिलेंगे।”
चुनाव आयोग पर पुराने आरोपों का पलटवार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए उसके शासनकाल का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में चुनाव आयोग को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश की थी। इस संदर्भ में उन्होंने 1993 में चुनाव आयोग में किए गए बदलावों और दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का उल्लेख किया।
उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र का हवाला दिया। गोपालस्वामी ने चुनाव आयुक्त नवीन चावला को पद से हटाने की सिफारिश की थी। राजनाथ सिंह के मुताबिक, गोपालस्वामी ने आरोप लगाया था कि नवीन चावला ने चुनाव आयोग की संवेदनशील जानकारी कांग्रेस नेताओं के साथ साझा की थी। रक्षा मंत्री ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए कांग्रेस से उसके पुराने रिकॉर्ड पर जवाब देने की जरूरत जताई।







