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188 करोड़ की सड़क निर्माणाधीन रहते ही होने लगी रिपेयरिंग, NH-130A की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर उठे सवाल

तखतपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से जबलपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130A पर सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। अभी सड़क का निर्माण कार्य पूरा भी नहीं हुआ है और सड़क के कुछ हिस्सों में रिपेरिंग हो रही है। सामने आई तस्वीरों में सड़क के बीच क्षतिग्रस्त हिस्से पर सीमेंट-कंक्रीट जैसी सामग्री से मरम्मत का काम दिखाई दे रहा है।
खड़े हुए कई सवाल
सवाल यह है कि जिस सड़क को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए बनाया जा रहा है, उसमें अभी से मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ रही है ? क्या निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का पालन किया गया ? और क्या RCC से किया जा रहा यह पैचवर्क सड़क की स्थायी मरम्मत है या सिर्फ तात्कालिक समाधान ?
बिलासपुर -मुंगेली राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130A
यह मार्ग क्षेत्र के लोगों के आवागमन और आसपास के इलाकों को जोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन निर्माणाधीन सड़क पर सामने आई खराबी ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीरों में सड़क की सतह पर एक हिस्सा क्षतिग्रस्त दिखाई दे रहा है, जहां मरम्मत के लिए सीमेंट-कंक्रीट जैसी सामग्री डाली गई है।
बताया जा रहा है कि संबंधित विभाग सड़क के खराब हिस्सों पर पैचवर्क और रिपेयरिंग का काम करा रहा है, लेकिन सवाल सिर्फ गड्ढे भरने का नहीं है। सवाल यह है कि सड़क निर्माण के शुरुआती चरण में ही मरम्मत की नौबत क्यों आई ? क्या यह सतह की खराबी है, नीचे की परत में कमजोरी है या निर्माण के दौरान किसी तकनीकी कमी का परिणाम ? इसका जवाब तकनीकी जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
सड़क निर्माण में मजबूती सिर्फ ऊपर बिछाई गई परत से नहीं आती। इसके लिए मिट्टी की तैयारी, सबग्रेड की मजबूती, सब-बेस और बेस लेयर की गुणवत्ता, निर्धारित मोटाई, उचित कम्पैक्शन और इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री का सही अनुपात बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि सड़क की निचली परतों में पर्याप्त मजबूती नहीं है, पानी की निकासी ठीक नहीं है या निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, तो समय से पहले सड़क की सतह पर दरारें, धंसाव या अन्य तरह की खराबी सामने आ सकती है। हालांकि, इस सड़क पर वास्तविक कारण क्या है, यह संबंधित हिस्से की तकनीकी जांच से ही स्पष्ट होगा।
RCC पैचवर्क कितना टिकाऊ ?
अब बात मरम्मत के तरीके की। सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से पर सीमेंट-कंक्रीट आधारित सामग्री से रिपेयरिंग की जा रही है, लेकिन क्या इस तरह की मरम्मत तकनीकी रूप से उपयुक्त है ?
विशेषज्ञों के अनुसार, मरम्मत की सही पद्धति इस बात पर निर्भर करती है कि सड़क मूल रूप से किस प्रकार की है, क्षति कितनी गहरी है और खराबी की वजह क्या है। यदि सड़क बिटुमिनस यानी डामर की बनी है, तो उसमें सीमेंट-कंक्रीट का पैच बनाने के लिए विशेष तकनीकी डिजाइन और उचित जोड़ की व्यवस्था जरूरी हो सकती है। वहीं, यदि सड़क का संबंधित हिस्सा कंक्रीट पेवमेंट का है, तो मरम्मत के लिए निर्धारित कंक्रीट ग्रेड, सतह की तैयारी, पुराने और नए हिस्से के बीच बॉन्डिंग, जोड़ की व्यवस्था तथा क्योरिंग जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं।
सिर्फ ऊपर से सामग्री डालकर गड्ढा भर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। मरम्मत से पहले क्षतिग्रस्त हिस्से की सीमा तय करना, कमजोर सामग्री हटाना, नीचे की परत की स्थिति जांचना और निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार काम करना जरूरी है। इसलिए विभाग को यह बताना चाहिए कि यहां किस प्रकार की सड़क संरचना है, किस तकनीकी मानक के तहत मरम्मत हो रही है और इस पैचवर्क की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कौन-से परीक्षण किए जा रहे हैं।
गुणवत्ता जांच और जवाबदेही का सवाल
राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं होती। संबंधित विभाग और नियुक्त इंजीनियरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित गुणवत्ता जांच, सामग्री की लैब टेस्टिंग, परतों की मोटाई, कम्पैक्शन और आवश्यकतानुसार कंक्रीट की मजबूती की जांच की जानी चाहिए, जहां सड़क की सतह खराब हुई है, वहां यह भी जांचना जरूरी है कि समस्या केवल ऊपरी परत तक सीमित है या नीचे की संरचना भी प्रभावित हुई है। यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं, यदि मरम्मत निर्धारित मानकों के अनुसार की जा रही है, तो विभाग को उसकी तकनीकी प्रक्रिया और गुणवत्ता जांच की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
रात में सफर करना जोखिम भरा, सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर उठे सवाल
बिलासपुर-मुंगेली राष्ट्रीय राजमार्ग-130ए पर सड़क सुरक्षा के जरूरी इंतजामों की कमी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। मार्ग पर अब तक मील स्टोन और दिशा सूचक बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। वहीं, बरसात के बाद रेट्रो-रिफ्लेक्टिव व्यवस्था किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मील स्टोन और दिशा सूचक बोर्ड के अभाव में खासकर रात के समय वाहन चालकों को रास्ते और दूरी की जानकारी मिलने में परेशानी होती है। ऐसे में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
आखिर जिम्मेदार कौन ?
राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा मानकों की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की है। सवाल है कि समय रहते इन कमियों को दूर क्यों नहीं किया गया ? अब जरूरत है कि विभाग तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक संकेतक लगवाए और सड़क सुरक्षा के इंतजाम दुरुस्त करें, ताकि यात्रियों का सफर सुरक्षित हो सके।
188 करोड़ से अधिक की सड़क, फिर भी अधूरे निर्माण पर सवाल !
बिलासपुर-मुंगेली एनएच-130ए की 30.8 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण पर 188 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है। ठेकेदार और एनएच विभाग के बीच 26 दिसंबर 2018 को अनुबंध हुआ था। विभागीय जानकारी के अनुसार, 24 नवंबर 2020 को निर्माण कार्य पूर्ण बताया गया, लेकिन आज भी कई जगह सड़क अधूरी नजर आती है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब विभाग ने निर्माण पूरा होने की जानकारी दे दी, तो फिर सड़क की मौजूदा स्थिति ऐसी क्यों है ? क्या निर्माण कार्य का सही तरीके से निरीक्षण किया गया था ? करोड़ों की लागत वाली सड़क पर अधूरे निर्माण की स्थिति विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करती है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करे।
सड़क निर्माण में लापरवाही, ठेकेदार को दो बार नोटिस
बिलासपुर-मुंगेली एनएच-130ए सड़क निर्माण में लापरवाही को लेकर संबंधित विभाग द्वारा ठेकेदार अनिल बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड और सब ठेकेदार कन्हैया लाल अग्रवाल को दो बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद सड़क की गुणवत्ता, अधूरे निर्माण कार्य और मेंटेनेंस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क पर मील स्टोन, दिशा सूचक बोर्ड और रोड मार्किंग जैसे जरूरी कार्यों की स्थिति भी चर्चा में है। ऐसे में सवाल उठता है कि बार-बार नोटिस जारी होने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं हुआ? अब देखना होगा कि विभाग ठेकेदार के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई करता है और सड़क के अधूरे कार्य कब तक पूरे होते हैं।
एनएच-130ए पर मेंटेनेंस में सीमेंट कंक्रीट से रिपेयरिंग, अधूरे कार्यों की होगी जांच
बिलासपुर-मुंगेली एनएच-130ए की डामर सड़क पर मेंटेनेंस के दौरान सीमेंट कंक्रीट से रिपेयरिंग किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में कार्यपालन अभियंता रोशन कुमार साहू ने बताया कि डामर की कमी के कारण ठेकेदार द्वारा मेंटेनेंस में कंक्रीट मटेरियल से रिपेयरिंग की जा रही है। वहीं, सड़क पर साइन बोर्ड, मील स्टोन, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव और रोड मार्किंग जैसे जरूरी कार्य अधूरे होने की बात पर उन्होंने संबंधित अधिकारी से जांच करवाने की बात कही है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और करोड़ों की लागत से बनी सड़क पर अधूरे कार्य कब तक पूरे किए जाते हैं।
एनएच-130ए की सड़क मरम्मत पर एसडीओ अनजान, निगरानी पर सवाल
बिलासपुर-मुंगेली एनएच-130ए की डामर सड़क पर सीमेंट कंक्रीट से रिपेयरिंग किए जाने के मामले में विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। एसडीओ अतुल पैगवार ने सड़क की लागत, निर्माण पूर्ण होने और रिपेयरिंग कार्य की जानकारी नहीं होने की बात कही।
करीब 188 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली सड़क पर मरम्मत के तरीके और साइन बोर्ड, मील स्टोन, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव व रोड मार्किंग जैसे कार्य अधूरे होने की शिकायतों के बीच जिम्मेदार अधिकारी की अनभिज्ञता समझ से परे है। अब सवाल है कि सड़क निर्माण और रखरखाव की निगरानी आखिर कौन कर रहा है?
सड़क की जानकारी देने में इंजीनियर भी असमर्थ
बिलासपुर-मुंगेली एनएच-130ए सड़क के निर्माण और मौजूदा स्थिति को लेकर इंजीनियर नरेंद्र खांडे से चर्चा की गई, तो उन्हें भी पूरी जानकारी नहीं थी। उन्होंने फाइल देखकर जानकारी देने की बात कही। इस खबर में निर्माण की लागत और समयसीमा से संबंधित जानकारी विभागीय प्रोजेक्ट समरी के आधार पर शामिल की गई है। ऐसे में करोड़ों की परियोजना से जुड़े अधिकारियों के पास स्पष्ट जानकारी नहीं होना विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करता है।

 

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