रायपुर

ब्रह्मविद द ग्लोबल स्कूल में कक्षा 8 के विद्यार्थियों ने रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ मनाई कृष्ण जन्माष्टमी..

  • मंदार, कल्पतरु, पारिजात और हरिचंद्र सदनों ने ‘अनुभूति’ कार्यक्रम में जीवंत की भगवान कृष्ण की लीलाएं..
  • सुदामा की मित्रता से लेकर महाभारत युद्ध तक — विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए धर्म और भक्ति के शाश्वत संदेश..

रायपुर (विश्व परिवार)। ब्रह्मविद द ग्लोबल स्कूल में आज एक विशेष दिन रहा, जब कक्षा 8 के विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित “अनुभूति” कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जो कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर को समर्पित था। इस कार्यक्रम में विद्यालय के चार सदनों — मंदार, कल्पतरु, पारिजात और हरिचंद्र — के विद्यार्थियों ने भगवान कृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया।

हरिचंद्र सदन ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता को दर्शाया, जो सच्चे भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है और मर्यादा को भी बनाए रखती है। इसके साथ ही सदन ने रास लीला की प्रस्तुति भी दी, जिसने भारतीय संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया है।

मंदार सदन ने बकासुर के वध का चित्रण किया — एक ऐसा राक्षस जो सारस के रूप में था — जिसके माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की बुराई पर विजय को दर्शाया गया। इस प्रस्तुति में बाल लीला के दृश्य भी शामिल थे, जो श्रीकृष्ण के बचपन के उस दौर को दर्शाते हैं जब उन्हें प्रेम से “कान्हा” कहकर पुकारा जाता था।

कल्पतरु सदन ने कालिया नाग की कथा प्रस्तुत की, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने ग्रामवासियों को कालिया नाग के आतंक से मुक्त कराया और उसे यमुना जल में वश में किया। सदन ने गोवर्धन लीला का भी मंचन किया, जिसमें श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ग्रामवासियों को मूसलधार बारिश से बचाया।

पारिजात सदन ने पांडवों और कौरवों के बीच लड़े गए महाभारत के महायुद्ध का मंचन प्रस्तुत किया, जिसे धर्म की पुनर्स्थापना की दिशा में श्रीकृष्ण की महान योजना के एक निर्णायक क्षण के रूप में दिखाया गया। सदन ने इस बात पर विशेष बल दिया कि महाभारत केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि अखंड भारत के गौरवशाली इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसके प्रमाण भी उपलब्ध हैं।

इस कार्यक्रम को अभिभावकों, शिक्षकों और स्टाफ द्वारा भरपूर सराहा गया, जो विद्यालय की सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक समझ को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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