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विश्व पर्यावरण दिवस पर कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर में पर्यावरण जागरूकता सम्मेलन आयोजित

रायपुर (विश्व परिवार)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर में पर्यावरण जागरूकता सम्मेलन एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन, छत्तीसगढ़ राज्य इकाई, कृषि महाविद्यालय रायपुर एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस की थीम के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने हेतु जन-जागरूकता पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में पौधरोपण कर किया गया। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण बढ़ाने के संकल्प के साथ फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन, छत्तीसगढ़ राज्य इकाई के सचिव श्री गोपाल कृष्णा ने पर्यावरण संरक्षण की वर्तमान आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बढ़ते जलवायु संकट के दौर में प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने संगठन द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता के क्षेत्र में संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए अधिकाधिक वृक्षारोपण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं कृषि महाविद्यालय रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली प्रकृति के संरक्षण पर आधारित रही है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत एवं छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए युवाओं को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृषि, पर्यावरण एवं ग्रामीण विकास एक-दूसरे के पूरक हैं तथा सतत विकास के लिए इन सभी क्षेत्रों में समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गौतम रॉय ने पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में वित्तीय संस्थानों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं से ऐसे ऋण प्रस्तावों एवं योजनाओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया, जिनका पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता हो तथा जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं सतत कृषि विकास को बढ़ावा देते हों।
कार्यक्रम में विषय-वस्तु विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार अग्रवाल ने कृषि क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने धान की कतार में सीधी बुआई, टपक सिंचाई प्रणाली, सूखा-रोधी किस्मों का उपयोग, उतेरा खेती, जीरो-टिल ड्रिल तकनीक तथा छत पर बागवानी जैसी नवाचार आधारित तकनीकों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से जल, ऊर्जा एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए कृषि उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।
कार्यशाला के दौरान बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों से यह भी अनुरोध किया गया कि वे ऋण प्राप्त करने के इच्छुक किसानों एवं उद्यमियों को अपने परियोजना प्रस्तावों में ऐसे घटकों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करें, जो कृषि एवं पशुपालन गतिविधियों के पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक हों। इससे हरित एवं सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन, छत्तीसगढ़ राज्य इकाई के अध्यक्ष श्री प्रियंक चोपड़ा, कृषि महाविद्यालय रायपुर के डॉ. रामामोहन सावु, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि, कृषि महाविद्यालय रायपुर के छात्र-छात्राएं, कृषि वैज्ञानिक एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर की विषय-वस्तु विशेषज्ञ डॉ. स्वाती पारधी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. राजेश कुमार अग्रवाल, विषय-वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, सतत कृषि विकास एवं हरित वित्तीय पहल के महत्व पर व्यापक चर्चा की गई तथा सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

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