छत्तीसगढ़भिलाई

कॉलेज में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर खुलवाने का झांसा, ठगों ने 12 लाख रुपए ऐंठे

भिलाईनगर (विश्व परिवार)। बदलते समय के हिसाब से ठगी के तरह-तरह के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन यह मामला कुछ अलग किस्म का है, जिसमें शातिरों ने ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू कराने के नाम पर दुर्ग जिले के एक निजी महाविद्यालय प्रबंधन को 12 लाख रुपए का चूना लगा दिया. प्रबंधन की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4) के तहत मामला दर्ज जांच शुरू कर दी है।
बात हो रही है दुर्ग जिला मुख्यालय से महज चंद किलोमीटर दूर अंडा स्थित शैल देवी महाविद्यालय की है. महाविद्यालय के अध्यक्ष राजन कुमार दुबे द्वारा नेवई थाना में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, ठगों ने खुद को एचसीएल टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग से जुड़ा बताया। पहले कॉलेज के ई-मेल पर परीक्षा सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव भेजा। इसके बाद कॉलेज का मुआयना कराने के लिए एक व्यक्ति को भेजा। भरोसा होने के बाद अलग-अलग काम के नाम पर कॉलेज से कई बार रुपए जमा कराए गए।
नेवई पुलिस ने बताया कि 12 अप्रैल 2025 को कॉलेज के आधिकारिक ईमेल पर एचसीएल टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग के नाम से मेल आया था। इसमें कॉलेज में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया था। मेल में वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति का मोबाइल नंबर भी दिया गया था। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की उससे लगातार बातचीत होने लगी। प्रस्ताव के बाद 17 अप्रैल को कॉलेज के ईमेल पर एक समझौता पत्र भेजा गया। अगले दिन कॉलेज के भौतिक मुआयने के लिए बुल आई नाम की संस्था से एक व्यक्ति के आने की जानकारी दी गई।
18 अप्रैल को एके साहू नाम का व्यक्ति कॉलेज पहुंचा। उसने कॉलेज की बिल्डिंग की तस्वीरें लीं और पूरे परिसर का मुआयना किया। जाते समय उसने जांच की रिपोर्ट भेजने की बात कही। 1 मई को दोपहर 3 बजे से 3.15 बजे तक कॉलेज अध्यक्ष और प्राचार्य कामेश्वर नाथ मिश्रा की एक जूम बैठक हुई। इसमें एचसीएल टेक्नोलॉजी की अनीता नाम की महिला से बातचीत हुई। इसके बाद 5 मई को गोपनीयता और साझेदारी से जुड़े कागज कॉलेज के ईमेल पर भेजे गए। कॉलेज ने 8 मई को उन पर हस्ताक्षर कर वापस भेज दिए।
पहले 5.98 लाख रु.का बिल भेजा
19 मई को कॉलेज को परीक्षा सेंटर के उपकरण के लिए 5 लाख 98 हजार 743 रुपए का बिल भेजा गया। इसमें एक निजी फर्म का खाता दिया गया। कॉलेज ने 21 मई को अपने बैंक खाते से इस रकम का भुगतान कर दिया। डीजी सेट के नाम पर 3.42 लाख और इसके बाद 23 मई को 58.5 केवी डीजी सेट के लिए 3 लाख 42 हजार 200 रुपए की मांग की गई। कॉलेज ने 26 मई को यह रकम भी उसी खाते में जमा कर दी। इस तरह दो बार में कॉलेज से 9 लाख 40 हजार 943 रुपए लिए जा चुके थे। इसके बाद 11 जून को कॉलेज को सामान भेजने और बीमा के नाम पर दो अलग-अलग रकम जमा करने के लिए कहा गया।
15 जून के बाद मोबाइल बंद
परिवहन के नाम पर 1 लाख 35 हजार 700 रुपए और बीमा के नाम पर 1 लाख 62 हजार 840 रुपए मांगे गए। कॉलेज ने 13 जून को दोनों रकम का भुगतान कर दिया। इन दोनों भुगतानों को मिलाकर 2 लाख 98 हजार 540 रुपए और जमा किए गए। शिकायत के अनुसार, पूरे मामले में कॉलेज प्रबंधन 12 अप्रैल से 14 जून तक वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति से लगातार बातचीत करता रहा। 15 जून के बाद संबंधित मोबाइल नंबर बंद हो गया। ईमेल का जवाब भी आना बंद हो गया था। इस तरह से संपर्क बंद होने के बाद कॉलेज प्रबंधन को ठगी का अहसास हुआ।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts