देशनई दिल्ली

भारत-न्यूजीलैंड FTA से देश में बढ़ेगा निवेश और रोजगार, लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स को होगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सोमवार को औपचारिक हस्ताक्षर हो जाएंगे। न्यूजीलैंड सरकार इसे अपने देश के लिए एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला सुनहरा अवसर बता रही है। भारत के लिए भी यह समझौता काफी फायदेमंद साबित होने वाला है।
FTA के माध्यम से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद
इस FTA के माध्यम से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। साथ ही, अधिक श्रम-निर्भर सेक्टर्स को विशेष लाभ मिलेगा। एग्रीमेंट के तहत न्यूजीलैंड ने अपनी 95 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारतीय निर्यात के लिए शुल्क में भारी कमी की है। इससे भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड बाजार में बड़े पैमाने पर ड्यूटी-फ्री पहुंच मिल सकेगी। एफटीए के लागू होने के बाद टेक्सटाइल, प्लास्टिक, लेदर और इंजीनियरिंग जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों के उत्पाद जीरो ड्यूटी पर न्यूजीलैंड जा सकेंगे। वर्तमान में इन पर औसतन 2.3 प्रतिशत टैरिफ लगता है।
न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने की घोषणा की
न्यूजीलैंड ने इस समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने की घोषणा भी की है। इसके अलावा, कौशलयुक्त भारतीय पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड में उच्च वेतन वाले अस्थायी रोजगार के अवसर खुलेंगे। समझौते के अंतर्गत न्यूजीलैंड 5,000 अस्थायी वीजा जारी करेगा, जिसके तहत भारतीय प्रोफेशनल्स तीन साल तक वहां काम कर सकेंगे। आईटी, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन, निर्माण और अन्य बिजनेस सर्विसेज से जुड़े पेशेवरों को इसकी सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा।
एफटीए में दोनों देशों के हितों पर रखा गया है समुचित ध्यान
एफटीए में दोनों देशों के हितों का समुचित ध्यान रखा गया है। भारत ने भी न्यूजीलैंड के लगभग 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर छूट दी है, जिसमें से 54.11 प्रतिशत पर छूट समझौते के लागू होते ही प्रभावी हो जाएगी। भेड़ का मांस, ऊन, कोयला और वानिकी उत्पादों को इसमें शामिल किया गया है।
हालांकि, भारत ने किसानों और एमएसएमई के हितों की रक्षा करते हुए डेयरी उत्पाद, पशु उत्पाद, सब्जियां और चीनी को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा है। सेब, किवीफ्रूट, शहद आदि पर भी कोटा और न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) की व्यवस्था की गई है। कुछ समुद्री उत्पादों जैसे मसल्स और सैल्मन पर सात वर्षों में धीरे-धीरे शुल्क समाप्त किया जाएगा।ऐसे में यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला साबित होगा।

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