रायपुर

कथा विश्राम दिवस के दिन बड़ी संख्या श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ाया कदम

रायपुर (विश्व परिवार)। महाराष्ट्रीयन तेली समाज भवन, अश्वनी नगर में आयोजित तीन दिवसीय श्री कथा ज्ञान यज्ञ का विश्राम के अंतिम दिवस का शुभारंभ जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य श्री की सिद्ध चरण पादुकाओं एवं श्री लीलामृत ग्रंथ का यजमान, पुरोहितों एवं श्रद्धालुओं द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं शास्त्रोक्त विधि से पूजन-अर्चन और माल्यार्पण के साथ किया गया। प्रातः प्रारंभ हुए कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने तीर्थक्षेत्र नाणीजधाम का दर्शन किया। इसके पश्चात बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य श्री से ऑनलाइन नामदीक्षा (नामदान) ग्रहण कर आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर होने का संकल्प लिया। इस अवसर पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य श्री ने ऑनलाइन प्रवचन में नामभक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य का मन स्वभाव से चंचल होता है, जो उसे लक्ष्य से भटकाता है। भक्ति के माध्यम से अंतरमन और बहिरमन की एकाग्रता बढ़ती है, जिससे निर्णय क्षमता, संयम, विवेक, साहस और सकारात्मक विचारों का विकास होता है कथा व्यास प्रवचनकार रोहित मोड़े ने श्री लीलामृत ग्रंथ पर आधारित प्रवचन में सद्गुरु के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु वह है, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर आत्मज्ञान का प्रकाश प्रदान करता है। सद्गुरु की संगति से मनुष्य के भीतर आध्यात्मिक जागरण होता है और वह सत्य एवं प्रकाश के मार्ग पर अग्रसर होता है।
प्रवचन के उपरांत संध्या समय रासलीला, संध्या आरती एवं कथा विश्राम समारोह का आयोजन किया गया वही कथा श्रवण करने वाले भक्त विशाल भंडारे का आनंद लिया।अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू,पार्षद शीतल पांडे पार्षद रामकिंकर रामानंद संप्रदाय छत्तीसगढ़ के उपपीठ प्रमुख घनश्याम माहेश्वरी, पीठ सदस्य सच्चिदानंद उपासने, पीठ सह प्रमुख मुन्नालाल मोटघरे, के अलावा छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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