रायपुर (विश्व परिवार)। प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बड़ी संख्या में बिजली उपभोक्ताओं द्वारा पहले की तुलना में अधिक बिजली बिल आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनसेवक अजय पनिकर ने सरकार और बिजली वितरण कंपनी से स्मार्ट मीटर व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अजय पनिकर का कहना है कि प्रदेशभर के बिजली कार्यालयों में प्रतिदिन अनेक उपभोक्ता बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। उनका आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के दौरान उपभोक्ताओं को किसी स्पष्ट शासनादेश, अधिसूचना या कानूनी आधार की जानकारी नहीं दी गई। उन्हें केवल यह बताया गया कि सरकार के निर्णय के अनुसार सभी उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर लगवाना होगा।
उन्होंने कहा कि शिकायत करने पर उपभोक्ताओं से मीटर परीक्षण कराने और उसके लिए शुल्क जमा करने को कहा जाता है। उनका प्रश्न है कि जब बड़ी संख्या में उपभोक्ता एक जैसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तब प्रत्येक उपभोक्ता से अलग-अलग जांच शुल्क लेना कितना उचित है। साथ ही यदि मीटर की जांच उसी व्यवस्था के माध्यम से होगी जिसने मीटर लगाया है, तो उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
अजय पनिकर ने मांग की है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने से संबंधित शासनादेश अथवा कानूनी आधार को सार्वजनिक किया जाए, बढ़े हुए बिजली बिलों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, मीटर परीक्षण किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराया जाए तथा जांच पूरी होने तक विवादित बिजली बिलों पर उपभोक्ताओं को उचित राहत प्रदान की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि बिजली अधिनियम, 2003 में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो सभी मौजूदा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर को अनिवार्य घोषित करता हो। साथ ही, उनके अनुसार ऐसा कोई सामान्य सर्वोच्च न्यायालय का आदेश भी उपलब्ध नहीं है, जिसमें पूरे देश के सभी उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया हो। उन्होंने सरकार से इस विषय में स्थिति स्पष्ट करने की भी मांग की है।







