भिलाई (विश्व परिवार)। श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग द्वारा “मूलभूत सूक्ष्मजीव वैज्ञानिक तकनीकें” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें 100 से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को सूक्ष्मजीव विज्ञान की मूलभूत अवधारणाओं के साथ-साथ प्रयोगशाला में उपयोग की जाने वाली व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण देना था। कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. स्मिता सेलट ने किया।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. स्मिता सेलट ने कहा कि उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक विकास में शोध की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों को जिज्ञासा, नवाचार और शोध के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूक्ष्मजीव विज्ञान का क्षेत्र अनुसंधान की व्यापक संभावनाओं से भरा हुआ है, जिसका लाभ उठाकर समाज और विज्ञान के विकास में योगदान दिया जा सकता है।
अधिष्ठाता डॉ. प्राची निमजे ने सूक्ष्मजीव विज्ञान एवं नैनोकण आधारित तकनीकों के समन्वय से अंतर्विषयी शोध की संभावनाओं पर जानकारी दी। वहीं, विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार देवांगन ने सूक्ष्मजीव विज्ञान की मूलभूत अवधारणाओं और वैज्ञानिक अनुसंधान में उनके महत्व को समझाया।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को पोषक माध्यम तैयार करने, शुद्ध संवर्धन, क्रमिक तनुकरण तथा सूक्ष्मजीवरोधी परीक्षण जैसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे दिन विद्यार्थियों को हैंगिंग ड्रॉप तकनीक एवं ग्राम अभिरंजन की प्रक्रिया से परिचित कराया गया। इसके साथ ही प्रयोगशाला में स्वच्छता, सुरक्षा और संदूषण रोकने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला का समन्वयन विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार देवांगन एवं डॉ. श्वेता सिंह चौहान ने किया। इस आयोजन से विद्यार्थियों में प्रयोगात्मक दक्षता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा शोध के प्रति रुचि विकसित करने में सहायता मिली।







