नई दिल्ली (विश्व परिवार)। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) 16 से 17 सितंबर तक भूटान दौरे पर रहें। भूटान यात्रा के दौरान डॉ. जयशंकर ने भूटान के विदेश मंत्री लिन्पो डी.एल. धुंगयल के साथ द्विपक्षीय सहयोग के सभी आयामों तथा आपसी महत्व के क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों की समीक्षा की। इस दौरे के दौरान भारत ने भूटान को 43 जर्सी गायें गिफ्ट में दी। यह कदम दोनों पड़ोसी देशों के बीच कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और तकनीकी सहयोग को मजबूत करता है।
भूटान को 43 जर्सी गायें गिफ्ट में देने के बाद जर्सी गाय एक बार फिर से चर्चा में आ गई है। लोग सोशल मीडिया पर जर्सी गाय के बारे में जानना चहा रहे हैं। चलिए आपको बताते हैं कि इस नस्ल की जर्सी गायों के मिलने से वहां के दुग्ध उत्पादन पर क्या असर पड़ेगा और एक सामान्य जर्सी गाय रोजाना कितना दूध देती है?
भूटान के बूमथांग स्थित नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर में आयोजित एक स्पेशल कार्यक्रम के दौरान भारत की ओर से 43 जर्सी गायें सौंपी। बूमथांग का यह नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर पिछले काफी समय से भूटान में पशुपालन को उन्नत बनाने के लिए काम कर रहा है, और भारत की यह मदद इस सेंटर की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खुद इस बात पर जोर दिया है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ विकास के अनुभवों को साझा करने में हमेशा आगे रहता है।
जर्सी गाय एक दिन में कितना दूध देती है
कृषि विशेषज्ञों और डेयरी एक्सपर्ट्स के मुताबिक जर्सी नस्ल की गायें अपनी उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता यानी मिल्क यील्ड के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। एक स्वस्थ और अच्छी तरह से देखभाल की गई जर्सी गाय रोजाना औसतन 15 से 30 लीटर तक दूध आसानी से दे सकती है। इसके अलावा इस नस्ल के दूध में फैट और सॉलिड्स की मात्रा भी बहुत अच्छी होती है. जो इसे कमर्शियल डेयरी फार्मिंग के लिए सबसे बढ़िया बनाती है। भूटान के ठंडे और पहाड़ी एरिया में जर्सी गायें बहुत ही आसानी से ढल जाती हैं। क्योंकि इनका शरीर वहां के मौसम के अनुकूल खुद को ढालने में सक्षम होता है। कम चारे और रखरखाव में भी यह बंपर पैदावार देती हैं।
40 हजार से अधिक किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
भारत सरकार की ओर से गिफ्ट की गई इन 43 जर्सी गायों का फायदा भूटान के हजारों किसानों को मिलेगा। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर के इस उन्नत ब्रीडिंग प्रोग्राम से भूटान के लगभग 40000 से अधिक स्थानीय किसानों को सीधा और प्रत्यक्ष लाभ पहुंचने के पूरी चांस है। जब इस नस्ल की जर्सी गायों की ब्रीडिंग आगे बढ़ेगी, तो स्थानीय किसानों को भी बेहतरीन क्वालिटी के बछड़े और उन्नत नस्लें मिल सकेंगी।
Visited the National Cattle Breeding Centre in Bumthang.
Handed over 43 pureline Jersey cows from India for dairy cattle breeding programme in Bhutan to enhance milk productivity and support local farmers. Glad to learn that the Centre’s breeding program will benefit forty… pic.twitter.com/eHsCtIonLz
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 16, 2026







