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कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक बीसी भरतिया छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय प्रवास पर किया व्यापारिक संगठनों से संवाद

  • कैट और स्वदेशी व्यापारी मंच ने छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण आर्थिक विकास को लेकर दो दिनों में की 18 व्यापक व्यापारिक बैठकें
  • स्थानीय व्यापार, स्वदेशी उत्पाद और छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर जोर – अमर पारवानी

रायपुर (विश्व परिवार)। देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के नेशनल वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन जितेन्द्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन सुरिन्दर सिंह, जीवत बजाज, प्रदेश महामंत्री श्री अवनीत सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र जग्गी, वासु माखीजा, राम मंधान, भरत जैन, राकेश ओचवानी एवं शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण आर्थिक विकास, स्थानीय व्यापार को नई गति देने तथा प्रदेश की स्वदेशी वस्तुओं, कला, संस्कृति और पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) एवं स्वदेशी व्यापारी मंच के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय व्यापक व्यापारी संवाद का आयोजन किया गया।

इस दौरान कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक बालकृष्ण भरतिया तथा कैट के राष्ट्रीय वाईस चेयरमेन अमर पारवानी ने रायपुर के विभिन्न प्रमुख बाजारों एवं व्यापारिक क्षेत्रों का दौरा कर अलग-अलग व्यापारिक संगठनों एवं व्यापारियों के साथ लगभग 18 महत्वपूर्ण बैठकें एवं संवाद किए। इन बैठकों में स्थानीय व्यापार को मजबूत करने, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने, व्यापार के विस्तार, निर्यात की संभावनाओं तथा प्रदेश की आर्थिक क्षमता को नई दिशा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

बालकृष्ण भरतिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, आदिवासी कला एवं शिल्प, हस्तकला, पारंपरिक खान-पान, लोक संस्कृति और पर्यटन को देश-दुनिया के बाजार से जोड़कर व्यापार एवं रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यापार और स्थानीय प्रतिभा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहुंचाने के लिए व्यापारिक संगठनों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

बालकृष्ण भरतिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक आर्थिक गतिविधियों और पूंजी का अधिक से अधिक प्रवाह पहुंचाना आवश्यक है। इसके लिए आदिवासी कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पाद, खान-पान एवं सांस्कृतिक विरासत को व्यवस्थित रूप से बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। साथ ही छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को विकसित करते हुए उन्हें वेडिंग डेस्टिनेशन एवं पर्यटन आधारित व्यापारिक केंद्रों के रूप में भी बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए।

अमर पारवानी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान, प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत को व्यापारिक अवसरों में परिवर्तित करने की दिशा में व्यापारी समाज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। स्थानीय से राष्ट्रीय और राष्ट्रीय से वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाकर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख विकसित एवं आर्थिक रूप से सशक्त राज्यों की श्रेणी में आगे ले जाने की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

इस अवसर पर कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक बालकृष्ण भरतिया ने स्वदेशी व्यापार को बढ़ावा देने तथा वोकल फॉर लोकल” एवं “लोकल को ग्लोबल” की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की व्यापारिक परंपरा केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं है, बल्कि “शुभ-लाभ” की अवधारणा पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि भारतीय व्यापारी की पहचान उचित गुणवत्ता का माल उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने, ग्राहकों के साथ विश्वास का संबंध बनाए रखने तथा अपने प्रतिष्ठानों में महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने से भी जुड़ी है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों के साथ उचित एवं सम्मानजनक व्यवहार भारतीय व्यापार संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

श्री भरतिया ने व्यापारियों से निर्यातक बनने की दिशा में सोच विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर निर्मित एवं उपलब्ध उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए व्यापारियों को संभावनाओं का अध्ययन करना चाहिए और नए बाजारों की तलाश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में ऐसे अनेक उत्पाद हैं, जिन्हें उचित ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार रणनीति के माध्यम से देश और विदेश में पहचान दिलाई जा सकती है।

उन्होंने सर्कुलर इकॉनमी की अवधारणा पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर उत्पन्न पूंजी का अधिक से अधिक हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था में ही घूमता रहे, इससे गांवों और छोटे शहरों में व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलती है।

दो दिवसीय प्रवास के दौरान विभिन्न व्यापारिक संगठनों के साथ हुए संवाद में व्यापारियों ने अपने क्षेत्र से जुड़े विषयों, चुनौतियों और सुझावों को भी राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा। कैट नेतृत्व ने व्यापारियों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय व्यापार एवं प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद और समन्वय के माध्यम से आगे बढ़ने की बात कही।

कैट के राष्ट्रीय चेयरमेन अमर पारवानी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की स्थानीय ताकत, व्यापारिक क्षमता, प्राकृतिक संपदा, कला-संस्कृति और पर्यटन को एक साथ जोड़कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है। इसके लिए व्यापारी, उद्योग, सरकार और समाज के बीच बेहतर समन्वय के साथ दीर्घकालिक प्रयास आवश्यक हैं।

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