नई दिल्ली (विश्व परिवार)। यूएनएचआरसी के 61वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार किया। 25 फरवरी को हाई-लेवल सेगमेंट के दौरान ‘राइट टू रिप्लाई’ का उपयोग करते हुए भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और ह्रह्म्द्दड्डठ्ठद्बह्यड्डह्लद्बशठ्ठ शद्घ ढ्ढह्यद्यड्डद्वद्बष् ष्टशशश्चद्गह्म्ड्डह्लद्बशठ्ठ (ह्रढ्ढष्ट) द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
अनुपमा सिंह ने कहा कि पाकिस्तान लगातार झूठा प्रचार कर रहा है और उसकी बयानबाजी में निराशा व ईर्ष्या झलकती है। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 1947 में जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूर्णत: वैध और अंतिम था। साथ ही पाकिस्तान से उन भारतीय क्षेत्रों को खाली करने की अपील की जो उसके अवैध कब्जे में हैं। ह्रढ्ढष्ट को भी एक सदस्य देश का इको चैंबर बनने के लिए आड़े हाथों लिया गया।
जम्मू-कश्मीर में विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए सिंह ने चिनाव रेल ब्रिज का जिक्र किया, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बताया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की परियोजनाओं को भी फर्जी कहा जा रहा है तो यह वास्तविकता से आंख मूंदने जैसा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 6 जून 2025 को चिनाब नदी पर बने इस पुल का उद्घाटन किया था। 359 मीटर ऊंचा यह पुल कश्मीर को भारत के व्यापक रेल नेटवर्क से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अनुपमा सिंह ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर का हालिया विकास बजट, पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मांगे गए बेलआउट पैकेज से दोगुना से अधिक है। उनके अनुसार, यह क्षेत्र में तेज विकास की गति को दर्शाता है, जबकि पाकिस्तान आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है।
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर पाकिस्तान की टिप्पणी का जवाब देते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि ऐसे देश से लोकतंत्र पर भाषण सुनना कठिन है, जहां निर्वाचित सरकारें शायद ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाती हैं। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में हालिया लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय मतदान हुआ, जो इस बात का संकेत है कि वहां के लोग हिंसा और आतंकवाद की विचारधारा को नकारते हुए विकास और स्थिरता के मार्ग पर आगे बढऩा चाहते हैं।





