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शराब घोटाला मामला: पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को हाईकोर्ट से राहत नहीं, जमानत याचिका खारिज

बिलासपुर (विश्व परिवार)। प्रदेश के चर्चित शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। वहीं इसी मामले में आरोपी दीपेन चावड़ा को अदालत ने जमानत प्रदान कर दी है।
जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है और इसमें आरोपी की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। ऐसे में जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी ने अपने दायित्वों के विपरीत जाकर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग में भूमिका निभाई है।
ईडी ने दिसंबर 2025 में किया था गिरफ्तार
मामले में निरंजन दास ने राज्य सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज दो अलग-अलग मामलों में जमानत की मांग की थी। उनके वकील ने अदालत में दलील दी कि ईडी ने उन्हें 19 दिसंबर 2025 को मौजूदा ईसीआईआर के तहत गिरफ्तार किया था, जबकि वे पहले से ही संबंधित एफआईआर में न्यायिक हिरासत में थे।
याचिका में यह भी कहा गया कि गिरफ्तारी से पहले रायपुर स्थित विशेष अदालत (पीसी एक्ट) से अनुमति नहीं ली गई थी और यह गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच के लिए निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद की गई थी।
पांचवीं सप्लीमेंट्री शिकायत में बनाया गया आरोपी
गिरफ्तारी के सात दिन बाद 26 दिसंबर 2025 को ईडी ने इस मामले में पांचवीं सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की, जिसमें निरंजन दास को आरोपी बनाया गया। इसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में हैं।
आवेदक की ओर से यह भी कहा गया कि कथित शराब नीति और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन से जुड़े लेनदेन में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी और विभागीय जांच में भी किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।
ईडी ने किया जमानत का विरोध
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश अधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडेय ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को भी जमानत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि निरंजन दास पूरे विभाग के प्रमुख अधिकारी थे और अनियमितताओं को रोकने में उनकी जिम्मेदारी बनती थी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निरंजन दास की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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