छत्तीसगढ़बालोद

धान खरीदी केंद्र में घोटाला: फर्जी बिल से लाखों की निकासी, विरोध पर खुला मामला

बालोद (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में भर्रीटोला (43) सेवा सहकारी समिति में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है, जहां प्राधिकृत अधिकारी एवं कुसुमकसा भाजपा मंडल अध्यक्ष ने पद का दुरुपयोग करते हुए प्रबंधक से मिलीभगत कर फर्जी बिल लगाकर 3 लाख 17 हजार रुपये की राशि आहरण की। मामला उजागर होने पर ग्रामीणों ने हंगामा किया। विवाद बढ़ता देख प्रबंधक ने राशि वापस समिति के खाते में जमा कराई।
दरअसल, भर्रीटोला (43) सहित रजह‍ी, ककरेल, देवपांडुम, चिपरा और जुनवानी के लगभग 815 किसान सेवा सहकारी समिति मर्यादित कुसुमकसा में अपना धान बेचते हैं। दूरी अधिक होने से किसानों को परेशानियां होती थीं। इससे राहत पाने के लिए क्षेत्र के किसानों ने भर्रीटोला (43) में धान खरीदी केंद्र खोलने की मांग की थी। शासन स्तर पर मांग पूरी होने के बाद ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर नवीन धान खरीदी केंद्र के निर्माण स्थल पर मुरुम डलवाकर श्रमदान से स्वयं समतलीकरण कार्य किया। साथ ही घेरा लगाने के लिए गड्ढे खोदकर बल्लियां लगाई, किंतु इन सभी कार्यों का फर्जी बिल लगाकर सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक भीखम लाल साहू ने प्राधिकृत अधिकारी एवं कुसुमकसा भाजपा मंडल अध्यक्ष योगेंद्र गांधी के नाम पर 3 लाख 17 हजार रुपये का चेक जारी कर दिया।
ग्रामीणों ने श्रमदान से धान खरीदी केंद्र स्थल का किया है समतलीकरण
जब मामले की जानकारी ग्रामीणों को हुई तो विवाद बढ़ने लगा। ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद प्रबंधक ने राशि वापस समिति के खाते में जमा कराई। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने चंदा इकट्ठा कर मुरुम मंगवाकर श्रमदान से धान खरीदी केंद्र स्थल का समतलीकरण कार्य किया तो फिर समिति प्रबंधक ने योगेंद्र गांधी के नाम से 3 लाख 17 हजार रुपये का चेक क्यों जारी किया। इसकी जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
वापस समिति में जमा कराई गई राशि : समिति प्रबंधक
समिति प्रबंधक भीखम लाल साहू का कहना है कि प्राधिकृत अधिकारी योगेंद्र गांधी ने अपने नाम से चेक दिया था, इसलिए उन्हें चेक जारी किया। मुझें यह जानकारी नहीं थी कि मुरुम ग्रामीणों द्वारा डलवाया गया था। जानकारी होने पर राशि वापस समिति के खाते में जमा कराई गई और ग्रामीणों द्वारा जिस वेंडर से मुरुम डलवाया गया था, उसके नाम चेक जारी किया गया है। जब ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। यदि ग्रामीण सामने नहीं आते तो भाजपा मंडल अध्यक्ष और समिति प्रबंधक की मदद से शासन को लाखों का चूना लगा दिया जाता।

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