देशनई दिल्ली

2030 तक ड्रोन निर्माण का ग्लोबल हब बनेगा भारत: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है।
भविष्य के युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका
राजनाथ सिंह ने कहा कि रूस-यूक्रेन और ईरान-इजराइल जैसे संघर्षों से स्पष्ट है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन तकनीक निर्णायक साबित होगी। ऐसे में भारत को इस क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को मजबूत करना होगा।
आत्मनिर्भर ड्रोन इकोसिस्टम पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को ऐसा ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करना होगा, जहां केवल अंतिम उत्पाद ही नहीं, बल्कि उसके सभी महत्वपूर्ण कंपोनेंट—जैसे सॉफ्टवेयर, इंजन, बैटरी और मॉड्यूल—भी देश में ही तैयार किए जाएं।
एमएसएमई और स्टार्टअप्स की अहम भूमिका
उन्होंने कहा कि एक मजबूत डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के निर्माण में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ एमएसएमई, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सरकार इस दिशा में सभी को सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है और मिशन मोड में काम करने की जरूरत है।
2030 तक ग्लोबल हब बनने का लक्ष्य
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आह्वान किया कि सभी हितधारक मिलकर काम करें, ताकि वर्ष 2030 तक भारत स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बन सके।
एमएसएमई सेक्टर में तेज़ वृद्धि
राजनाथ सिंह ने बताया कि 2012-13 के आसपास देश में एमएसएमई की संख्या करीब 4.67 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 8 करोड़ हो गई है। यह वृद्धि इस क्षेत्र में मौजूद अपार संभावनाओं को दर्शाती है।
सरकारी पहल से मिला बढ़ावा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। ‘उद्यम पोर्टल’ और ‘उद्यम असिस्ट पोर्टल’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे उद्योगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
डिफेंस इनोवेशन में बढ़ती प्रगति
रक्षा मंत्री ने बताया कि 58 प्रोटोटाइप को खरीद के लिए मंजूरी दी जा चुकी है, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 3,853 करोड़ रुपए है। इसके अलावा 45 प्रोक्योरमेंट कॉन्ट्रैक्ट साइन किए गए हैं, जिनकी कीमत करीब 2,326 करोड़ रुपए है।
नवाचार से मजबूत होगा रक्षा क्षेत्र
उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से ही बड़े बदलाव की शुरुआत होती है। यदि उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और सरकार मिलकर काम करें, तो भारत एक मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम विकसित कर सकता है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल कर सकता है।

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