छत्तीसगढ़रायपुर

स्मार्ट ट्रैफिक और बेहतर लॉजिस्टिक्स के लिए चेम्बर और महालेखाकार कार्यालय एकजुट, ई-टिकटिंग और GPS पर जोर

  • व्यापार और सुगम यातायात के लिए ”अर्बन मोबिलिटी” पर हुआ मंथनः- ऑडिट से पहले
  • चेम्बर द्वारा सौंपे जायेंगे ट्रांसपोर्ट संघों से प्राप्त सुझाव

रायपुर (विश्व परिवार)। आज बॉम्बे मार्केट स्थित चैधरी देवीलाल उद्योग व्यापार भवन में शहरी गतिशीलता (Urban Mobility) की चुनौतियों और सुधारों पर चर्चा हेतु एक महत्वपूर्ण हितधारक बैठक (Stakeholders Meeting) संपन्न हुई। यह बैठक छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी के नेतृत्व में, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के लेखापरीक्षा योजना 2026-27 के अंतर्गत महालेखाकार (लेखापरीक्षा) छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में शहरी यातायात, माल परिवहन और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से जुड़ी जमीनी समस्याओं को समझना तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा प्रस्तावित ऑडिट हेतु विशेषज्ञों और संघों से सुझाव आमंत्रित करना था।
बैठक में महालेखाकार कार्यालय से उपस्थित सीनियर डीएजी¼Senior DAG½ मिस प्रियाति कावड़ो ने अपने संबोधन में कहा कि CAG का उद्देश्य केवल वित्तीय ऑडिट तक सीमित नहीं है, बल्कि हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि शहरी गतिशीलता जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं आम जनता और व्यापारिक जगत के लिए कितनी प्रभावी साबित हो रही हैं। हितधारकों से प्राप्त ये व्यावहारिक सुझाव नीतिगत सुधारों में मील का पत्थर साबित होंगे।
वहीं, वरिष्ठ लेखापरीक्षा अधिकारी मो. इकबाल अंसारी एवं मनीष कुमार शुक्ला ने तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डेटा और जमीनी फीडबैक का सही तालमेल ही भविष्य की परिवहन प्रणाली को सुदृढ़ बना सकता है। उन्होंने पारदर्शिता और डिजिटल समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में चर्चा के आधार पर एक हस्ताक्षरित कार्यवृत्त (Minutes of Meeting) तैयार किया गया, जिसे आगामी सुधारों के लिए आधार बनाया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विभिन्न परिवहन संघों ने अपनी समस्याओं और सुझावों को विस्तार से रखा जो निम्नानुसार हैं:-
1. माल परिवहन एवं लॉजिस्टिक्सः- चेम्बर पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में शहर के भीतर स्थित गोदामों तक माल पहुँचाने के लिए समय की कड़ी पाबंदियाँ हैं। प्रवेश के सीमित घंटों के कारण ट्रकों की लंबी कतारें लगती हैं, जिससे न केवल माल की डिलीवरी में देरी होती है, बल्कि शहर की आंतरिक यातायात व्यवस्था भी चरमरा जाती है। इसके समाधान के लिए रात के समय माल की आवाजाही को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने पर चर्चा हुई तथा यह भी सुझाव दिया कि शहर के चारों कोनों पर आधुनिक ”लॉजिस्टिक्स हब्स” और ”ट्रांसपोर्ट नगर” विकसित किए जाएं। इससे भारी वाहनों को शहर के भीतर आने की आवश्यकता कम होगी। इन हब्स में वेयरहाउसिंग, लोडिंग-अनलोडिंग के लिए पर्याप्त स्थान और ट्रक ड्राइवरों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
2. आपातकालीन सेवाएँ:- आपातकालीन वाहनों की आवाजाही एवं प्राथमिकता देते हुए मुख्य समस्या भारी यातायात जाम और संकरी सड़कों के कारण चेम्बर द्वारा स्थानीय प्रशासन को ट्रांसपोर्ट व होलसेल बाजार को शहर के बाहर स्थानांतरित करने तथा शहर में यातायात दबाव कम करने हेतु प्रस्ताव दिया गया है जिसका लेखा-जोखा पत्र के माध्यम से चेंबर द्वारा महालेखापरीक्षक विभाग को प्रेषित करेगा। साथ ही रायपुर में जयस्तंभ चैक, टाटीबंध और शास्त्री चैक जैसे प्रमुख स्थानों पर भारी विलंब होने के कारण आपात कालीन वाहनों जैसे एंबुलेंस आदि के लिए अलग लेन तथा स्वतः ही ग्रीन सिग्नल होने पर चर्चा हुई।
3. सार्वजनिक परिवहन:- बस टर्मिनल्स और डिपो की बदहाली पर ध्यान आकर्षित करते हुए चेंबर ने महालेखाकार कार्यालय के अधिकारियों को अवगत कराया कि वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश बस टर्मिनल्स और डिपो की स्थिति अत्यंत जर्जर है। भवनों की मरम्मत न होने से बरसात में जल-जमाव और संरचनात्मक असुरक्षा बनी रहती है। बस स्टैंड की क्षमता से अधिक वाहनों का दबाव होने के कारण बसों को खड़ा करने और उनके रखरखाव के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं रहता। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि बस स्टैंड्स पर यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। यात्रियों के बैठने के लिए प्रतीक्षालय अपर्याप्त हैं। विशेष रूप से साफ-सुथरे बाथरूम, पीने के ठंडे पानी की व्यवस्था और लंबी दूरी के यात्रियों के लिए रिटायरिंग रूम जैसी मूलभूत सुविधाएं या तो उपलब्ध नहीं हैं या बेहद दयनीय स्थिति में हैं। इससे यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
4. अधोसंरचना और तकनीक पर जोर:- चेम्बर ने इस बात पर चिंता जताई कि हाईवे और शहर की सीमाओं के पास कहीं भी व्यवस्थित ”ट्रक टर्मिनल्स” उपलब्ध नहीं हैं। चेम्बर ने कहा कि लंबी दूरी के चालकों के लिए आधुनिक विश्राम गृह बनाए जाएं, जहाँ शौचालय, भोजन और सुरक्षित पार्किंग की सुविधा उपलब्ध करवाने की बात कही। इससे चालकों की थकान कम होगी और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
5. वाहनों के लिए समर्पित कॉरिडोर:- भारी वाहनों के लिए समर्पित कॉरिडोर बनाने पर जोर देते हुए बताया कि शहर के रिंग रोड को भारतमाला परियोजना के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जाना चाहिए। यदि रिंग रोड और हाईवे के बीच कनेक्टिविटी में सुधार होता है, तो भारी वाहन बिना शहर में प्रवेश किए गंतव्य तक पहुँच सकेंगे, जिससे ईंधन और समय दोनों की बचत होगी। चेंबर ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए रिंग रोड और भारतमाला रोड के जंक्शन पर ”मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक पार्क” विकसित करने की बात कही। जिससे एक ही स्थान पर रेल और सड़क परिवहन का मेल होने से माल की हैंडलिंग आसान होगी।
चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने इस अवसर पर कहा कि शहरी गतिशीलता को सुगम बनाना व्यापार और जनजीवन दोनों के लिए आवश्यक है। उन्होंने सभी संघों से प्राप्त सुझावों को महालेखाकार कार्यालय के समक्ष मजबूती से रखते हुए भविष्य में बेहतर समन्वय का आश्वासन दिया और संबंधित समस्याओं को लेटर हेड पर लिखित रूप में चेम्बर कार्यालय में 1-2 दिन के भीतर जमा करने का निवेदन किया ताकि इसे महालेखाकार आडिट कार्यालय में चेम्बर के माध्यम से दिया जा सके।
सभी संघों ने एक सुर में स्वीकार किया कि वर्तमान में व्यावसायिक वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग, स्टैंड, डिपो और लोडिंग-अनलोडिंग पॉइंट की भारी कमी है, जिससे यातायात बाधित होता है और संचालन लागत बढ़ती है।
ट्रांसपोर्टरों ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जीपीएस (ळच्ै), डिजिटल प्रबंधन प्रणालियों और स्वच्छ ऊर्जा (ब्छळध्म्ट) को अपनाने हेतु अपनी सहमति जताई, बशर्ते सरकार इसके लिए आवश्यक वित्तीय और ढांचागत सहयोग प्रदान करे।
प्रतिनिधियों ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा की जा रही इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब ऑडिट प्रक्रिया में हितधारकों से सीधे सुझाव मांगे जा रहे हैं, जो भविष्य में एक
सुदृढ़ परिवहन नीति बनाने में सहायक होगा साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में भी राज्य सरकार और स्थानीय निकायों को परिवहन संबंधी नियम बनाते समय जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले इन संघों से परामर्श करना चाहिए ताकि नियमों का कार्यान्वयन प्रभावी हो सके।
इस अवसर पर चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी, कोषाध्यक्ष निकेश बरड़िया, वाइस चेयरमेन चेतन तारवानी, कार्यकारी अध्यक्ष-राजेश वासवानी, जसप्रीत सिंह सलूजा, उपाध्यक्ष-लोकेश चंद्रकांत जैन, दिलीप इसरानी, जितेन्द्र शादीजा, मनीष प्रजापति, पंकज जैन, मंत्री-भरत पमनानी, ट्रांसपोर्ट चेम्बर अध्यक्ष हरचरण सिंह साहनी, कोषाध्यक्ष दिवाकर अवस्थी, वरिष्ठ लेखापरीक्षा अधिकारी (अर्बन मोबिलिटी) मिस प्रियाति कावड़ो सीनियर डीएजी, वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी- मोहम्मद इकबाल अंसारी, मनीष कुमार शुक्ला, सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी -एम.रवि, प्रियांशु साहू, ताज हुसैन, शारदानंद झा, आइएसबीटी व्यापारी संघ के सचिव नदीम सोहेल, छत्तीसगढ़ परचून ट्रांसपोर्ट संघ के महामंत्री कमल किशोर गोलछा,यातायात महासंघ प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली, सचिव खेमराज साहू, राजधानी गुड्स ट्रांसपोर्ट संरक्षक बनारसीलाल पांडे, अध्यक्ष स्वरूप चोपड़ा, महामंत्री नीरज बंसल, वाइसचेयरमेन सिद्धार्थ भल्ला, सचिव विनीत तिवारी, जे.पी.मित्तल, अंकित संचेती, पवन अग्रवाल, जसविंदर सिंह संधु, हरनूत सिंह, पुरूषोत्तम सिंह राजपूत, तोमेश साहू, राजकुमार साठे, नीरज साठे, दिलबाग सिंह, भगवान सिंह, सुरिन्दर पाल सिंह, हरपाल सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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