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सरकार ने छत्तीसगढ़ में प्रमुख नदियों के कायाकल्प के लिए व्यापक रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की

  • हमें यह धरती अपने पूर्वजों से विरासत में नहीं मिली है; बल्कि हमने इसे अपने बच्चों से उधार लिया है – बृजमोहन अग्रवाल

नई दिल्ली / रायपुर (विश्व परिवार)। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने छत्तीसगढ़ में प्रमुख नदियों के कायाकल्प के लिए अपनी चल रही रणनीति और रूपरेखा का विस्तृत विवरण दिया है । छत्तीसगढ़ के सांसद द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए, सरकार ने महानदी, शिवनाथ, खारून, अर्पा, हसदेव और केलो नदियों में गंभीर प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए जा रहे महत्वपूर्ण कदमों की रूपरेखा प्रस्तुत की ।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा की गई यह पूछताछ, खारून जैसी नदियों में प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए कायाकल्प परियोजनाओं में देरी को रोकने की तत्काल आवश्यकता पर केंद्रित थी । उन्होंने मल-जल के निर्वहन को रोकने, उपचारित जल के लिए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के मानकों को लागू करने और नदी के तटों पर स्थित गैर-अनुपालक (नियमों का पालन न करने वाली) औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई करने के सरकारी उपायों पर भी सवाल उठाए।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा: “महानदी से लेकर खारून तक हमारी नदियां छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा हैं। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि कायाकल्प की रूपरेखाओं को लागू करने में बिल्कुल भी देरी न हो। हालांकि नए एसटीपी (STP) का निर्माण होना महत्वपूर्ण है, लेकिन हमें सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए अर्पा, हसदेव और केलो नदियों में निर्वहन करने वाले सभी औद्योगिक और नगरपालिका निकायों से एनजीटी (NGT) दिशानिर्देशों के पूर्ण और वास्तविक समय (real-time) के दिशानिर्देशों के पूर्ण और वास्तविक समय (real-time) के अनुपालन करना होगा, क्यूंकि हमें यह धरती अपने पूर्वजों से विरासत में नहीं मिली है; बल्कि हमने इसे अपने बच्चों से उधार लिया है।”
मल-जल शोधन और बुनियादी ढांचे के अपडेट
नदियों में मल-जल के निर्वहन को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए, सरकार शोधन (treatment) के बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है:
महत्वपूर्ण रूप से, जिन 16 स्थानों पर एसटीपी अभी भी निर्माणाधीन हैं, वहां अनुपचारित कचरे के निर्वहन को रोकने के लिए एक कार्यात्मक अंतरिम उपाय के रूप में मल-गाद शोधन संयंत्र (एफएसटीपी / FSTP) स्थापित किए गए हैं ।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि औद्योगिक इकाइयां पर्यावरणीय मानकों का पालन करें, सरकार उन्नत वास्तविक समय निगरानी और कानूनी प्रावधानों का उपयोग कर रही है, जबकि केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दोनों जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों को सख्ती से लागू कर रहे हैं ।
17 अत्यधिक प्रदूषणकारी श्रेणियों के सकल प्रदूषणकारी उद्योगों (GPI) और इकाइयों ने सफलतापूर्वक ऑनलाइन सतत बहिस्त्राव निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस / OCEMS) स्थापित कर ली है । संधारणीयता (sustainability) को बढ़ावा देने के लिए, सीपीसीबी (CPCB) ने व्यवहार्य औद्योगिक क्षेत्रों में शून्य तरल निर्वहन (जेडएलडी / ZLD) के लिए दिशानिर्देश भी तैयार किए हैं, जिससे ताजे पानी पर निर्भरता को कम करने के लिए उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग को प्रोत्साहित किया जा सके ।

 

 

 

 

 

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