(विश्व परिवार)। ज्येष्ठ अधिकमास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी इस साल 27 मई, बुधवार को मनाई जा रही है. यह एकादशी सामान्य नहीं बल्कि अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है. क्योंकि यह हर तीन साल में एक बार पुरुषोत्तम (अधिक) मास में आती है. एकादशी का व्रत को सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक लगभग 24 घंटे तक नियमपूर्वक किया जाता है. अधिकमास भगवान विष्णु को समर्पित होता है और एकादशी भी उन्हीं की आराधना का दिन है, इसलिए इस दिन व्रत और पूजा करने से विशेष पुण्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
युधिष्ठिर के पूछने पर श्री कृष्ण ने सुनाई थी इस एकादशी की महिमा
पौराणिक कथा के अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से प्रश्न किया हे प्रभु! पुरुषोत्तम मास में आने वाली एकादशी कौन सी है. उसका क्या फल है. किस देवता की पूजा करनी चाहिए. मनुष्य को इस दिन क्या करना चाहिए? इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया हे राजन! अधिकमास में आने वाली यह एकादशी ‘कमला एकादशी’ या ‘पद्मिनी एकादशी’ कहलाती है. यह सभी पापों का नाश करने वाली और मनुष्य की हर इच्छा को पूर्ण करने वाली हैं. जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा से करता है. उस पर माता लक्ष्मी सदैव प्रसन्न रहती है।
अवन्तीपुरी की पूरी कथा: पाप से पुण्य तक…
प्राचीन समय में अवन्तीपुरी नामक नगरी में शिवशर्मा नाम के एक विद्वान ब्राह्मण रहते थे. उनके पांच पुत्र थे, लेकिन सबसे छोटा पुत्र अत्यंत दुष्ट और पाप कर्मों में लिप्त था. उसके आचरण से दुखी होकर पिता और परिवार ने उसे घर से निकाल दिया. अपमानित और दर-दर भटकता हुआ वह जंगलों में रहने लगा है. एक दिन भाग्यवश वह तीर्थराज प्रयाग पहुंचा. वहां उसने त्रिवेणी संगम में स्नान किया. भूख-प्यास से व्याकुल वह इधर-उधर भटकते हुए एक आश्रम में पहुंचा, जहां हरिमित्र मुनि निवास करते थे. उस समय पुरुषोत्तम मास चल रहा था और वहां कई साधु-संत एकत्र होकर कमला एकादशी का महत्व बता रहे थे. उस ब्राह्मण पुत्र ने भी श्रद्धा से यह कथा सुनी और व्रत करने का संकल्प लिया।
व्रत का प्रभाव: आधी रात को प्रकट हुईं मां लक्ष्मी
उसने विधिपूर्वक एकादशी का व्रत किया, दिनभर निराहार रहकर भगवान विष्णु का स्मरण करता रहा, रात के समय जब आधी रात हुई, तब अचानक वहां दिव्य प्रकाश फैला और माता लक्ष्मी प्रकट हुईं. माता लक्ष्मी ने कह, हे ब्राह्मण! मैं तुम्हारे इस व्रत से अत्यंत प्रसन्न हूं. श्रीहरि की आज्ञा से मैं वैकुण्ठ से तुम्हें वर देने आई हूं, तुम जो चाहो मांगो. वह ब्राह्मण भाव विभोर होकर बोला, हे माता! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो मुझे इस व्रत की पूरी महिमा बताएं, जिसे साधु-संत गाते है।
माता लक्ष्मी ने कहा, कमला एकादशी का व्रत और इसकी कथा सुनना अत्यंत पुण्य दायी है. इससे पापों का नाश होता है, बुरे स्वप्न दूर होते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है. जो व्यक्ति श्रद्धा से इस व्रत का पालन करता है, भगवान विष्णु स्वयं उस पर कृपा करते है. एकादशी के दिन नाम-जप, कीर्तन और कथा श्रवण करने से मनुष्य के करोड़ों पाप नष्ट हो जाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि देवता भी इस व्रत के पुण्य के लिए पृथ्वी पर जन्म लेने की इच्छा रखते है. जो भक्त श्रीहरि का नाम जपते हैं, उनकी ब्रह्मा आदि देवता भी पूजा करते हैं।
कथा का फल
इसके बाद वह ब्राह्मण पूरी श्रद्धा से एकादशी का पालन करता रहा और अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई. यह कथा हमें सिखाती है कि चाहे व्यक्ति कितना भी पापी क्यों न हो. यदि वह सच्चे मन से भगवान की शरण में आ जाए और नियमपूर्वक व्रत-भक्ति करे, तो उसका जीवन बदल सकता है।







