मुंगेली (विश्व परिवार)। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही द्वारा प्रशासनिक प्रताड़ना के लगाए गए आरोपों के बाद यह मामला अब राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। हितग्राही विमला बाई एवं उनके परिजनों का कहना है कि निर्माण कार्य पर स्टे लगाए जाने के तीन महीने बाद भी स्थानीय राजस्व अमला यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि वह अपनी निजी भूमि पर मकान बना रहा है या फिर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रहा है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वह मौके पर मौजूद अपनी 13 डिसमिल निजी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास का निर्माण करा रहा है। यदि जांच में यह साबित हो जाए कि सरकारी जमीन पर एक इंच भी निर्माण हुआ है तो प्रशासन को बुलडोजर चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, वह स्वयं निर्माण हटाने को तैयार है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद राजस्व विभाग इस विवाद का अंतिम निराकरण नहीं कर सका।
8 बार जांच, 3 बार सीमांकन
शिकायतकर्ता देवेंद्र एवं उनके परिजनों के अनुसार अब तक 8 बार जांच टीम मौके पर पहुंच चुकी है और 3 बार सीमांकन भी कराया जा चुका है, लेकिन आज तक किसी अधिकारी ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि निर्माण निजी भूमि पर है या शासकीय भूमि पर। इसी वजह से वह लगातार दफ्तरों और अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हुआ, जिससे उसे आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी।
जानबूझकर मामले को उलझाया गया : शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले को जानबूझकर उलझाया और लंबित रखा गया इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर अनावश्यक देरी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी जरूरतमंद हितग्राही को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
आज भी पीएम आवास पर लगा है रोक
गौरतलब है कि एक ओर कलेक्टर कुन्दन कुमार राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण और लंबित मामलों की शीघ्र सुनवाई के निर्देश लगातार दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह मामला महीनों से अटका हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायतकर्ता का 13 डिसमिल भूमि पर निर्माण का दावा सही है या गलत तो आखिर इसका स्पष्ट जवाब अब तक क्यों नहीं दिया गया। फिलहाल इसी विवाद के चलते लगाया गया स्थगन आदेश आज भी प्रभावशील बना हुआ है।
कलेक्टर ने लिया संज्ञान
इधर मामले को लेकर जिला प्रशासन ने भी अपना पक्ष सामने रखा है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि लोरमी विकासखंड के ग्राम बेलसरी में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विमला बाई के नाम से बन रहे निर्माणाधीन आवास से जुड़ा यह प्रकरण अतिक्रमण और सीमांकन विवाद से संबंधित है। जनदर्शन में शिकायत प्राप्त होने के बाद कलेक्टर कुन्दन कुमार ने मामले पर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी जांच के निर्देश दिए थे।
प्रशासन के मुताबिक संबंधित भूमि को लेकर शिकायत मिलने के बाद पूर्व पीठासीन अधिकारी द्वारा स्थगन आदेश जारी किया गया था। मामला विवादित होने के कारण निष्पक्ष जांच और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से राजस्व निरीक्षक एवं पटवारियों की संयुक्त टीम गठित की गई थी। टीम ने मौके पर सीमांकन और जांच की कार्रवाई पूरी कर ली है तथा जांच प्रतिवेदन शीघ्र प्राप्त होने की बात कही गई है।
कलेक्टर कुंदन कुमार का कहना है कि रिपोर्ट मिलते ही पूरे प्रकरण का नियमानुसार त्वरित निराकरण किया जाएगा। शासन का उद्देश्य किसी भी पात्र हितग्राही को प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित करना नहीं है, बल्कि नियमों और तथ्यों के आधार पर पारदर्शी निर्णय सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष कार्यवाही की जा रही है। जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद आवश्यक निर्णय लेते हुए हितग्राही को नियमानुसार राहत प्रदान की जाएगी।
राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
हालांकि शिकायतकर्ता का सवाल अब भी बरकरार है कि जब 8 बार जांच और 3 बार सीमांकन के लिए टीम पहुंची तब भी तीन महीने बाद तक यह स्पष्ट क्यों नहीं हो पाया कि निर्माण निजी भूमि पर हो रहा है या शासकीय भूमि पर। प्रदेश में सुशासन तिहार के बीच एक सामान्य राजस्व विवाद का लंबा खिंचना स्थानीय राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।







