छत्तीसगढ़रायपुर

जेंडर समानता एवं शास्वत उपजीविका पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

रायपुर (विश्व परिवार)। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) एवं चैतन्य संस्था के संयुक्त तत्वावधान में SIRD, निमोरा (रायपुर) में “जेंडर नॉर्म्स, जेंडर रिसोर्स सेंटर (GRC)  एवं सुदृढ़ीकरण विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य जेंडर समानता को ग्रामीण विकास एवं आजीविका कार्यक्रमों के साथ जोड़ते हुए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को सशक्त बनाना, जेंडर रिसोर्स सेंटरों की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाना तथा जेंडर नोर्म्स  के अधयन को प्रस्तुत करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं पौधारोपण के साथ स्वागत कर किया गया।

इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन संचालक अश्विनी देवांगन, चैतन्य संस्था की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुश्री कल्पना पंत, SIRD की संयुक्त संचालक सीमा मिश्रा, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से एल.के. शर्मा, धमतरी की जेंडर मास्टर ट्रेनर सुलोचना साहू, कांकेर की जेंडर मास्टर ट्रेनर चैती रात्रे तथा दुर्ग जिले के उतई थाना की परामर्शदाता राधा बांधे उपस्थित रहे।

चैतन्य संस्था की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुश्री कल्पना पंत ने बताया कि वर्ष 2018 से एनआरएलएम के अंतर्गत जेंडर समानता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप आज छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने जेंडर रिसोर्स सेंटरों के प्रभावी संचालन हेतु विकसित “अस्तित्व” ऐप की जानकारी देते हुए कहा कि इससे केस मैनेजमेंट, मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग अधिक पारदर्शी, सुरक्षित एवं व्यवस्थित होगी।

धमतरी जिले की जेंडर मास्टर ट्रेनर सुलोचना साहू ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जीआरसी के माध्यम से घरेलू हिंसा एवं अन्य लैंगिक हिंसा से प्रभावित महिलाओं और बालिकाओं को समय पर परामर्श, कानूनी सहायता तथा आवश्यक विभागों से जोड़कर सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

कांकेर जिले की जेंडर मास्टर ट्रेनर चैती रात्रे ने बताया कि सामुदायिक स्तर से कार्य प्रारंभ कर प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास के माध्यम से वे आज जेंडर मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण परामर्श एवं समुदाय के विश्वास ने महिलाओं तक प्रभावी सहायता पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

दुर्ग जिले के उतई थाना की परामर्शदाता राधा बांधे ने बताया कि पुलिस थाने में परामर्श सेवाओं के माध्यम से पारिवारिक विवादों एवं महिलाओं से जुड़े मामलों का संवेदनशील समाधान किया जा रहा है तथा आवश्यकता अनुसार संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

कार्यक्रम में सीनियर रिसर्चर सुश्री श्रेया सिंह ने जेंडर नॉर्म्स पर किए गए शोध के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि सामाजिक सोच में सकारात्मक परिवर्तन के लिए महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता, आर्थिक भागीदारी तथा संस्थागत सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं की संचालक डॉ. स्मृति देवांगन ने कहा कि महिलाओं एवं किशोरियों में एनीमिया आज एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है, जिसके प्रति जागरूकता और समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मातृ मृत्यु अनुपात में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने सुरक्षित मातृत्व, समय पर स्वास्थ्य जांच, पोषण, परिवार की सक्रिय भागीदारी तथा हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए संचालित विशेष जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने महिलाओं एवं बालिकाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और अधिकारों से संबंधित योजनाओं एवं कानूनों की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

शिक्षा विभाग के सहायक संचालक ओ.पी. चौधरी ने कहा कि बालिका शिक्षा, कौशल विकास, ड्रॉपआउट रोकने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से जेंडर समानता को मजबूत किया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की अनुसंधान एवं प्रशिक्षण विशेषज्ञ श्रीमती निशा गोस्वामी ने महिला हेल्पलाइन-181, सखी वन स्टॉप सेंटर, नवा बिहान योजना, शक्ति सदन, महतारी वंदन योजना तथा अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए महिलाओं तक इन सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने पर बल दिया।

प्रदान संस्था की प्रतिनिधि सुश्री आभा ने कहा कि महिलाओं की आजीविका केवल आय अर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता, संसाधनों पर अधिकार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़ी है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण एवं सामूहिक उद्यमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

ट्रांसफॉर्मिंग रूरल इंडिया फाउंडेशन की डॉ. अनु सिंह ने शोध के आधार पर बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं की आय, आत्मविश्वास, डिजिटल पहुँच और निर्णय लेने की क्षमता में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच मजबूत समन्वय को जेंडर समानता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन संचालक अश्विनी देवांगन ने कहा कि जेंडर रिसोर्स सेंटर महिलाओं तक संवेदनशील एवं समयबद्ध सहायता पहुँचाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने जेंडर मास्टर ट्रेनर्स से महिलाओं की वास्तविक समस्याओं तक पहुँचने, उन्हें उचित संस्थागत सहायता दिलाने तथा सभी विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, जेंडर मास्टर ट्रेनर्स, पुलिस परामर्शदाता, तकनीकी सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा महिला क्षेत्र में कार्यरत संस्था के  प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुश्री सुधा कड़व, राज्य समन्वयक, चैतन्य संस्था द्वारा किया गया।

 

 

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