छत्तीसगढ़भानुप्रतापपुर 

कोयलीबेड़ा की 10 सूत्रीय मांगों पर उबाल, ग्रामीणों ने किया चक्काजाम; भानुप्रतापपुर-नारायणपुर मार्ग ठप

भानुप्रतापपुर (विश्व परिवार)। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा में पिछले 6 दिनों से 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 पंचायत के 68 गांव के लोग धरना दे रहे हैं। आज आंदोलन का 7वां दिन है। मांगें पूरी नहीं होने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने अंतागढ़ में चक्काजाम कर दिया है। इसके चलते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई है। भानुप्रतापपुर से नारायणपुर मार्ग पर वाहनों का आवागमन थम गया है। वहीं आंदोलनरत ग्रामीणों में सांसद और विधायक के प्रति भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
ये है ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
जिला सहकारी बैंक की स्थापना की जाए। ब्लॉक मुख्यालय वापस पखांजूर से कोयलीबेड़ा लाया जाए। कोयलीबेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला डॉक्टर की नियुक्ति की जाए। स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय कोयलीबेड़ा में खोला जाए। डीएमएफ राशि प्रभावित क्षेत्र में शत-प्रतिशत खर्च किया जाए। जर्जर स्कूल आश्रम की मरम्मत की जाए। कॉलेज की मांग पूरी की जाए। खाद-बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जाए। अंतागढ़ से कोयलीबेड़ा रोड का डामरीकरण किया जाए। राजस्व प्रकरणों के सरलीकरण के लिए कोयलीबेड़ा तहसील को अनुभाग अंतागढ़ में जोड़ा जाए।
बालोद में आदिवासी समाज ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव
इधर छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पाटेश्वर धाम से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आदिवासी समाज के हजारों लोगों ने सोमवार को कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स को पार कर कलेक्टर कार्यालय परिसर में प्रवेश कर अपनी मांगों को लेकर वहीं धरने पर बैठ गए। समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही चूल्हे में खाना बनाकर प्रदर्शनकारियों को खिलाया।
आदिवासी समाज के लोगों का आरोप है कि पाटेश्वर धाम के बालक दास के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि करीब 12 एकड़ से अधिक भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है, जिसे तत्काल हटाया जाना चाहिए।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि पाटेश्वर धाम में पंचायत के प्रस्ताव के बिना एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्माण कार्य कराया गया है। उन्होंने इन निर्माणों को अवैध बताते हुए उन्हें हटाने की मांग की है। साथ ही जलकैनी माता स्थल को नुकसान पहुंचाने और उसे पाटने का भी आरोप लगाया गया। ग्राम सभा की अनुमति के बिना रूढिजन्य पारंपरिक सीमा क्षेत्र के भीतर जल, जंगल, जमीन पर कब्जा, अवैध खनन एवं निर्माण कार्य पर कार्रवाई व 17 मई से 15 जून 2026 तक प्रस्तावित मेला कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

68 गांव के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, अंतागढ़ में किया चक्काजाम, जानिए क्या है मांगें…

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