- उद्योग नीति एवं स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन
रायपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) की रायपुर शाखा के संयुक्त तत्वावधान में आज 26 जून 2026 को बॉम्बे मार्केट स्थित चैधरी देवीलाल व्यापार उद्योग भवन में एमएसएमई दिवस के उपलक्ष्य में, अर्ध दिवसीय महत्वपूर्ण संगोष्ठी ”एमएसएमई महोत्सव” का भव्य आयोजन किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उद्योग संचालनालय रायपुर के अतिरिक्त संचालक शिव कुमार राठौर तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में एमएसएमई डीएफओ के संयुक्त संचालक श्री एल.के. परगनिहा उपस्थित रहे जो छत्तीसगढ़ में उद्यमियों के विकास, मार्गदर्शन और विभिन्न सरकारी योजना के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अतिथियों का स्वागत चेम्बर और आईसीएआई के पदाधिकारियों द्वारा पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की मूर्ति की पूजा अर्चना कर, दीप प्रज्वलन कर विधिवत रूप से किया गया।
आईसीएआई की रायपुर शाखा अध्यक्ष सी.ए. रश्मि वर्मा एवं सचिव सी.ए. ऋषिकेश यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए और इस संयुक्त प्रयास को व्यापारियों व प्रोफेशनल्स के हित में एक मील का पत्थर बताया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि एसएमई केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ है, जो रोजगार और नवाचार के जरिए आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर रहा है। आज पूंजी की कमी किसी भी उद्यमी के सपनों की बाधा नहीं बननी चाहिए, क्योंकि सरकार की योजनाओं के तहत अब बिना कुछ गिरवी रखे (संपाशर््िवक मुक्त) भी बैंक ऋण आसानी से उपलब्ध करा रहे हैं। मैं चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से भी आग्रह करता हूँ कि वे केवल टैक्स सलाहकार न बनकर उद्यमियों को सरकारी योजनाओं और वित्तीय अनुशासन का सही मार्गदर्शन दें। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स सदैव सरकार और व्यापारियों के बीच एक मजबूत सेतु की तरह खड़ा है। व्यापारिक जगत को किसी भी विभाग या बैंक से जुड़ी कोई भी समस्या हो, वे बिना किसी संकोच के चेम्बर से संपर्क करें, हम उनके विकास और हक के लिए सदैव पूरी ताकत से साथ खड़े रहेंगे।
चेम्बर के वाइस चेयरमेन चेतन तारवानी (सी.ए.) ने कहा कि आज का दौर प्रतिस्पर्धा और आधुनिक तकनीक का है। छत्तीसगढ़ का व्यापारी अपनी मेहनत और लगन के लिए जाना जाता है, लेकिन अक्सर सही समय पर सही नीतिगत जानकारियों के अभाव में हमारे स्थानीय लघु उद्योग (एमएसएमई) उन शासकीय लाभों से वंचित रह जाते हैं जिनके वे हकदार हैं। इस ”एमएसएमई महोत्सव” के माध्यम से हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर के व्यापारी तक केंद्र और राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों व सब्सिडी का सीधा लाभ पहुंचे। चेम्बर भविष्य में भी व्यापारियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए ऐसे मार्गदर्शक सत्रों का आयोजन लगातार करता रहेगा।
द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित उप संचालक सुश्री मौसमी राहा ने स्टार्टअप नीति, नवाचार और स्टार्टअप के लिए सरकारी सहायता विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं और नए उद्यमियों को नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि किस प्रकार सरकारी सहायता और स्टार्टअप नीति के माध्यम से नए विचारों को एक सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है। उन्होंने उपस्थित सभी व्यापारियों और सदस्यों को प्रोजेक्टर के माध्यम से एक विस्तृत और प्रभावी प्रेजेंटेशन दिया गया। इस लाइव प्रेजेंटेशन के जरिए एमएसएमई नीतियों, ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रियाओं, सब्सिडी के नियमों और स्टार्टअप्स को मिलने वाली सरकारी सहायताओं के एक-एक बिंदु को स्क्रीन पर लाइव समझाकर बहुत ही सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे उपस्थित लोगों को पूरी प्रक्रिया समझने में बेहद आसानी हुई।
तत्पश्चात् प्रमुख वक्ता सी.ए. अरिहंत कुमार बोथरा ने छत्तीसगढ़ में एमएसएमई के लिए औद्योगिक नीति एवं केंद्रीय सरकारी प्रोत्साहन विषय पर अत्यंत विस्तृत और सारगर्भित प्रस्तुति दी। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार द्वारा मिलने वाली विभिन्न सब्सिडी, ब्याज छूट और औद्योगिक विकास के लिए तय किए गए प्रोत्साहनों के बारे में विस्तार से समझाया।
जैसे फैक्ट्री लगाने के लिए जमीन और बैंक लोन के दस्तावेजों पर आपको 100ः स्टाम्प ड्यूटी की छूट मिलेगी, साथ ही शुरूआती 5 से 15 सालों तक बिजली बिल में विद्युत शुल्क भी पूरी तरह माफ होता है। नई फैक्ट्री सेटअप करने पर कुल पूंजी निवेश का 30ः से 45ः तक का सीधा कैश अनुदान (सब्सिडी) और बैंक लोन के ब्याज पर 40ः से 70ः तक की भारी राहत मिलती है। बिना किसी गारंटी के ₹5 करोड़ तक का लोन पाने के लिए आप ”उद्यम रजिस्ट्रेशन” करा सकते हैं, जिसके बाद सरकारी विभागों में आपके माल की 25ः खरीद अनिवार्य हो जाती है। इसके अलावा, नए इनोवेटिव आइडियाज के लिए पेटेंट कराने की लागत का 50ः पैसा वापस मिल जाता है और महिला उद्यमियों के स्टार्टअप्स के लिए सरकार अलग से अतिरिक्त आर्थिक सहायता और विशेष पैकेज भी देती है।
संगोष्ठी के अंतिम चरण में एक विशेष प्रश्नोत्तरी सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित व्यापारियों, नए उद्यमियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने विशेषज्ञों के सामने अपनी व्यावहारिक शंकाएं रखीं। वक्ताओं ने सरकार की जटिल औद्योगिक नीतियों, सब्सिडी के लिए आवेदन की प्रक्रिया और स्टार्टअप्स को मिलने वाली वित्तीय सहायता से जुड़े सभी सवालों के बेहद सरल और तकनीकी जवाब दिए। विशेषज्ञों द्वारा किए गए इस त्वरित शंका समाधान और सही मार्गदर्शन से उपस्थित सभी सदस्य अत्यंत लाभान्वित हुए और उन्होंने इस सत्र की सराहना की।
इस अवसर पर चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी, वाइस चेयरमेन चेतन तारवानी, कार्यकारी अध्यक्ष राधा किशन सुंदरानी, जसप्रीत सिंह सलूजा, कार्यकारी महामंत्री विकास आहूजा, उपाध्यक्ष दिलीप इसरानी, जितेंद्र शादीजा, दिनेश अठवानी, महेन्द्र बगरोडिया, विनय साहू, मंत्री- अमर बरलोटा, गुलाब चंद्र साहू, अमित अग्रवाल, प्रशांत गुप्ता, रितेश वाधवा, शंकर पिंजानी, संदीप मेघानी, गुरनीश पाल सिंह हंस, विनोद पाहवा, कांकेर इकाई महामंत्री विक्रम देवनानी, ट्रांसपोर्ट चेम्बर अध्यक्ष हरचरण सिंह साहनी, महिला चेम्बर अध्यक्ष डॉ ईला गुप्ता, कोषाध्यक्ष नम्रता अग्रवाल सहित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति, व्यापारी वर्ग, नए स्टार्टअप्स के उद्यमी और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स उपस्थित थे, जिन्होंने विशेषज्ञों से अपनी शंकाओं का समाधान भी किया।







