नई दिल्ली (विश्व परिवार)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति प्रेम को पवित्र राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल देने वाला महान प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हजारों सेनानियों को साहस, त्याग और आशा प्रदान की।
उपराष्ट्रपति शुक्रवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी (IIAS), शिमला द्वारा आयोजित ‘वंदे मातरम् की यात्रा’ पर स्थायी प्रदर्शनी के उद्घाटन और ‘सरदार पटेल का विजन: एकीकरण, एकजुटता और संघवाद’ विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को आभासी माध्यम से संबोधित कर रहे थे।
मुख्य बातें:
- वंदे मातरम् पर: उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह गीत भारत की स्वतंत्र चेतना का प्रतीक है। इसने देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाया और आज भी राष्ट्र के प्रति समर्पण, आत्मगौरव तथा राष्ट्रीय एकता का प्रेरक स्रोत बना हुआ है।
- सरदार पटेल पर: उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने केवल रियासतों का विलय नहीं किया, बल्कि देशवासियों के दिलों का एकीकरण किया। उनके नेतृत्व ने एक राष्ट्र, एक संविधान और साझा राष्ट्रीय भविष्य की मजबूत नींव रखी।
उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि सच्ची देशभक्ति शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह ईमानदारी, बेहतर कार्य संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण के रूप में हमारे रोजमर्रा के आचरण में दिखनी चाहिए। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे ‘वंदे मातरम्’ के शाश्वत संदेश और सरदार पटेल के राष्ट्र-निर्माण के आदर्शों को अपनाते हुए एक एकजुट, आत्मविश्वासी और समावेशी भारत के निर्माण में योगदान दें।
इस अवसर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी (IIAS) द्वारा ‘वंदे मातरम् की यात्रा’ विषय पर स्थायी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया तथा सरदार पटेल की एकता, एकीकरण और भारतीय संघीय व्यवस्था पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। उपराष्ट्रपति के संबोधन ने राष्ट्रवाद, एकता और देशभक्ति के महत्व को दोहराते हुए समारोह को गहरी प्रेरणा दी।







